नहीं रहीं तीजन बाई
काठमांडू, आषाढ़ २१ – पंडवानी गायन शैली वैश्विक स्तर पर ले जाने वाली तीजन बाई का निधन हो गया है ।
१९९० के दशक में दूरदर्शन के अनेक कार्यक्रमों में तीजन बाई दिखाई देती थीं। वे अपनी पंडवानी गायन शैली के लिए जानी जाती थीं। साधारण–सी दिखने वाली तीजन बाई असाधारण प्रतिभा की धनी थीं।
उन्होंने शनिवार की रात ३.१५ बजे रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली । वे ७० वर्ष की थी । पिछले कुछ समय से वे बीमार चल रही थीं । छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंडवानी गायन को उन्होंने वैश्विक पहचान दिलाई । उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था ।
रविवार सुबह ११ बजे तीजन बाई के शव को उनके पैतृक गांव गनियारी लाया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया ।
तीजन बाई ने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली से पंडवानी को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक में नई पहचान दिलाई । महाभारत की कथाओं को सुनाने की प्रेरणा उन्हें नाना से मिली थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर शोक जताया। उन्होंने एक्स हैंडल पर लिखा कि ‘उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में पहचान दिलाई । उनका जाना कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।’ छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि पंडवानी के जरिए उन्होंने देश–विदेश में राज्य का नाम रोशन किया।

