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क्या फेसबुक कब्रगाह बन चूका है ?

 

पटना,21,मार्च ।

यह हर उस आदमी के साथ होता होगा जो फेसबुक पर मौजूद है । फेसबुक आपको याद दिलाती है कि आपको अपने किसी दोस्त को जन्मदिन की बधाई देनी है, लेकिन आप जानते। हैं कि उसकी मृत्यु हो। चुकी है । आपके खाते में किसी की मित्रता का आमन्त्रण या कोई और संदेश पड़ा रहता है, और आप जानते हैं कि वः इस दूNया में नहीं है । ऐसे कितने ही लोग हैं, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन फेसबुक पर उनके खाते अबतक मौजूद है । बताता जाता है कि फेसबुक शुरू होने के आठ साल बाद सन् 2012 में ही फेसबुक के लगभग तीन करोड़ सदस्यों की हो जाती है । जानकारों का कहना है कि कभी ऐसा होगा कि जीवित फेसबुक सदस्यों के मुकाबले मृत फेसबुक सदस्यों की तादाद ज्यादा होगी । उनका कहना हा कि फेसबुक लोगोँ के आभासी संवाद और मेल-मिलाप की जगह है, इसी के साथ ही यह एक विराट कब्रगाह बन चूका है । facebook20Sep1316526188_storyimage

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फेसबुक पर करोड़ों मृत लोगों की उपस्थिति की वजह कि मृत लोगों खाते अमूमन बन्द नही होते । फेसबुक में यह व्यवस्था है कि किसी खातेदार के मरने पर उसकी सूचना उसके खाते में डाल दी जाय । तब वे ‘समृति शेष ‘ खाते हो जाते हैं और उनके जन्मदिन जैसी सूचनाये दुसरो को मिलनी बन्द हो जाती है । लेकिन ज्यादातर खातेदारों के साथ ऐसा नही होता है, बल्कि की खातों को मृतको परिजन लगातार सक्रिय बनाये रखतें हैं ।

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वर्चुअल दुनियां की यह अमरता भले ही कुछ लोगोँ को आकर्षक लगे लेकिन कई लीग इसे खतरनाक मानते हैं । जितना जरूरी जीवन है उतनी ही जरूरी मृत्यु भी है । जितना जरूरी सृजन है, उतना ही जरूरी विध्वंस भी है, बल्कि दोनों ही परस्पर पूरक है, एक दूसरे की बिना उसका अस्तित्व नही है । यादास्त जितना बड़ा वरदान है, भूलना भी उतना ही बड़ा वरदान है ।

( हिंदुस्तान में आज का सम्पादकीय से …..) 

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