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माँ ! कहती है …..जीने से बेहतर, हँसकर तू, जीवन अर्पण कर।

 

गंगेश मिश्र

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जागो वीर !
मधेशी जागो,
डट कर लड़ो,
न भागो।
घुट-घुट कर,
जीने से बेहतर,
हँसकर तू,
जीवन अर्पण कर।
तोड़ दे तू,
सारे बन्धन को,
हक़ के ख़ातिर,
मौत वरण कर।
माँ कहती है,
डर मत,
उठ बढ़ चल;
कर्तव्य के पथ पर,
साहस कर,
विचलन से बचकर,
फ़र्ज़ लहू का,
आज अदा कर ।।

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