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मधेश नें बहुत कुछ दिया हैं नेपाल को अव हर हाल में शुद्ध कें साथ वापस लेंगें : नेतृ सरिता गिरी

 
सरिता गिरी, राजनीतिज्ञ

हिमालिनी डेस्क
काठमांडू, ४ अप्रील ।

मैं समझ सकती हूँ कि आज मधेश के उन युवाओं में कितनी पीडा और आक्रोश है जिन्होंने सी.के. राउत के साथ सपना देखा है‌। पीडा हम जैसों को भी ह्रैं कि गजेन्द्र बाबु के बाद हमने भी अपना एक जीवन दिया लेकिन उसके बाद भी आज हम अत्यन्त दयनीय स्थिति में है। मधेशी युवाओं के सामने कठिन रास्ते पर चलने के सिवा और कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा होगा । हमलोगों ने भी कठिन रास्तों पर ही अपना जीवन बिताया है ।

मधेश का नया पुस्ता अत्यन्त पढा लिखा है , अत्यन्त उर्जावान हैं लेकिन उसके पास अपनी क्षमता, कल्पनाशीलता और उर्जा का प्रयोग कर अपना सुखद संसार बनाने के लिए स्थान नहीं है , ना ही मान और सम्मान की जगह है । लेकिन धैर्य और संयम की आवश्यकता है। मैं अभी तक स्वतंत्र मधेश के निष्कर्ष पर नहीं पहुची हूँ । मुझको लगता है कि इस देश को हमने बहुत दिया है लेकिन लिया कुछ नहीं है । और मै‍ लेना चाहती हूँ ।

जब मैं मधेश के खेतों मे‌ काम करती हूँ तो मैं उन पूर्वजों की पीडा को महसूस करती हूँ कि कितनी कठिनाइयों से पहाडों और जंगलों को काटकर उन्होंने खेतों को बनाया होगा ओर सदियों तक अन्न उपजा कर इस देश को पाला होगा । परिवारों ने बच्चों को पाला पोषा है और उनकी कमाई पर यहाँ राज करने वाले राज करते हैं । इसीलिए अब हमको लेना ह्रै। और इसके लिए पहले इस देश में एक समग्र मधेश राष्ट्र बनाने की कोशिश करें जहाँ सब स्वतंत्र , सुखी और सम्मानित हों । अगर सफल नहीं हुए तो अन्य रास्ते तो हमेशा खुले मिलेंगे ।

खुली हवा में और खुले आकाश के नीचे निर्धक्क होकर काम करने का वातावरण हम सब मिलकर बनाएँ । मेरा सी‍‍. के. राउतजी आ्रैर उनके सभी साथियों से भी यही आग्रह है । अलग होने के लिए तो आठ जिल्ला आज भी शासकों ने अलग कर ही दिया है लेकिन क्या हमारा हक उतना ही बनता है ?

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