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७२वें स्वतन्त्रता दिवसः नेपाल–भारत मैत्री समाज द्वारा शुभकामना आदन–प्रदान (फाेटाे फिचर सहित)

 

आर्थिक सहकार्य पर वक्ताओं की जोर

लिलानाथ गौतम, १६ अगस्त, काठमांडू
पड़ोसी देश भारत की ७२वें स्वतन्त्रता दिवस (१५ अगस्त) के अवसर नेपाल–भारत मैत्री समाज ने बिहीबार काठमांडू स्थित सोल्टी होटल में शुभकामना आदन–प्रदान विशेष कार्यक्रम आयोजन किया । समाज के अध्यक्ष प्रेम लस्करी की सभापतित्व में सम्पन्न कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने शुभकामना मन्तव्य व्यक्त करते हुए भारतीय जनता को शुभकामना दिया । इसके साथ–साथ वक्ताओं ने भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम और नेपाल–भारत संबंध पर चर्चा की ।
७२वें स्वतन्त्रता दिवस पर शुभकामना मन्तव्य व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि तथा नेपाल सरकार के परराष्ट्रमन्त्री प्रदीप ज्ञावली ने कहा कि भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में नेपाली राजनेता वीपी कोइराला, मनमोहन अधिकारी जैसे नेताओं की भी सहभागिता रही थी । मन्त्री ज्ञावली ने कहा कि नेपाल की राजनीतिक परिवर्तन में भारतीय सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा । उन्होंने कहा कि नेपाल–भारत बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा धार्मिक सम्बन्ध परापूर्वकाल से जारी है, जो कभी भी ‘ब्रेक’ होनेवाला नहीं है । उनका यह भी कहना है हाइड्रोपावर, सडक जैसे भौतिक पूर्वधार निर्माण तथा विकास संबंधी कार्य में भारतीय सहयोग प्रशंसनीय है ।


विश्व जगत के लिए ही भारत को शाक्तिशाली प्रजातन्त्रिक राष्ट्र बताते हुए मन्त्री ज्ञवाली ने कहा कि अब नेपाल–भारत बीच आर्थिक सहकार्य होना भी जरुरी है । उनको मानना है कि भारत में जो तीव्र आर्थिक वृद्धिदर है, उससे नेपाल को भी फायदा लेना चाहिए । जलस्रोत के जरिए आर्थिक अन्तर–सम्बन्ध बिस्तार पर जोर देते हुए मन्त्री ज्ञावली ने कहा कि दो देशों के बीच की गई सम्झौता को प्रभावकारी रुप में कार्यान्वयन करनी चाहिए ।


कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए नेपाल के लिए भारतीय राजदूत महामहिम मंजीव सिंह पुरी ने कहा कि नेपाल–भारत बीच आर्थिक सहकार्य सम्बन्धी जो सपना है, वह भी जल्द ही पूरी होनेवाला है । महामहिम राजदूत पुरी को मानना है कि नेपाल–भारत बीच जो सामाजिक, सांस्कृतिक तथा धार्मिक सम्बन्ध है, उसको सही सदुपयोग कर नेपाल में धार्मिक पर्यटकों की संख्या में वृद्धि किया जा सकता है, जो नेपाल की आर्थिक समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण साबित होनेवाला है । राजदूत पुरी ने यह भी कहा कि बिमस्टेक सम्मेलन में सहभागी होने के लिए भारतीय प्रधानमन्त्री मोदी चौथी बार नेपाल भ्रमण में आ रहे हैं । उन्होंने कहा कि उस वक्त पशुपति (गौशाला) में निर्मित नेपाल के ही सबसे बड़ी धर्मशाला उद्घाटन होने जा रहा है, जो धार्मिक पर्यटकों के लिए खुशी की बात है ।

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राजदूत पुरी ने कहा कि नेपाल–भारत बीच जो प्राचीन सम्बन्ध है, उसको सहज बनाकर नेपाल में भारतीय पर्यटकों की संख्या में वृद्धि किया जा सकता है । राजदूत पुरी के अनुसार जनकपुर तक भारतीय रेल जल्द ही आनेवाला है और वीरगंज की व्यापारिक नाका को भी सहज संचालन किया जा रहा है । नेपाल–भारत के बीच आर्थिक और धार्मिक सम्बन्ध पर जोर देते हुए राजदूत पुरी ने कहा– ‘नेपाल–भारत बीच कोई ऐसी शक्ति है, जो नेपाल–भारत को आपस में बांध कर रखती है ।’
कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए पूर्व प्रधानमन्त्री तथा नयाँ शक्ति पार्टी नेपाल के संयोजक डा. बाबुराम भट्टराई ने कहा कि विगत की तिक्ततापूर्ण सम्बन्ध को भूल कर नेपाल–भारत बीच नयां सम्बन्ध बिस्तार करनी चाहिए, जो २१वीं शदी के जनभावना अनुसार हो सके । उनका मानना है कि नेपाल, भारत के साथ आर्थिक रुप में अन्तरनिर्भर है, इसीलिए नेपाल को समृद्ध बनाना है या नहीं, इसमें भारत की भूमिका महत्वपूर्ण होती है । डा. भट्टराई ने कहा कि आज की युग आर्थिक सम्बन्ध का युग है और नेपाल के लिए भारतीय सहयोग अपरिहार्य है ।

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उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल के आम जनता में भारत के प्रति अभी भी आशंका है कि भारत, नेपाल की आन्तरिक राजनीति में अनावश्यक हस्तक्षेप करती है । आम नेपाली जनता में व्याप्त इस तरह का मानसिकता को हटाने के लिए भारतीय भूमिका पर जोर देते हुए डा. भट्टराई ने कहा कि इपीजी मार्फत बिगत की सभी समस्या को सम्बोधन कर नेपाल–भारत के बीच नयां सम्बन्ध विकास करनी चाहिए, जहां नेपाली जनता भी समान स्वतन्त्रता और सार्वभौमिकता अनुभव कर सके । डा. भट्टराई को कहना है कि इतिहास के एक कालखण्ड में उपर्युक्त साबित आपसी सम्बन्ध दूसरे कालखण्ड के लिए अनुर्पयुक्त भी हो सकता है, इसीलिए नेपाल–भारत सम्बन्ध को नयां दृष्टिकोण से परिभाषित करनी चाहिए ।


इसीतरह कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति परमानन्द झा ने कहा कि नेपाल–भारत बीच जो खुली सीमा है, उससे नेपाल–भारत के जनता लाभात्वित हो रहे हैं, जिसके ऊपर अंकुश लगाने की कोशीश नहीं होनी चाहिए । राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी (प्रजातान्त्रिक) के अध्यक्ष पशुपति शमशेर को भी मानना है कि नेपाल–भारत बीच जो साझा धर्म और संस्कृति है, उसको कोई भी नहीं तोड़ सकता । उनका यह भी मानना है कि नेपाल की राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक विकास के लिए भारतीय सहयोग हमेशा प्राप्त हो रही है । उनकी यह अपेक्षा है कि भविष्य में भी भारतीय सहयोग जारी रहेगा ।
इसीतरह कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए काठमांडू महानगरपालिका के मेयर विद्यासुन्दर शाक्य ने कहा कि प्रजातान्त्रिक स्थायित्व के लिए भारत ने जो सहयोग किया है, वह अविष्मरणीय है । उनका यह भी मानना है कि राजनीतिक दृष्टिकोण से नेपाल–भारत बीच कभी कभार आपसी तिक्तता आ जाती है, लेकिन सामाजिक तथा धार्मिक दृष्टिकोण से कभी भी नहीं । मेयर शाक्य ने यह भी कहा कि नेपाल और भारत दोनों देशों ने अपने देश में प्रजातान्त्रिक लडाई साथ–साथ शुरु किया है और एक–दूसरे को भरपूर साथ दिया है । निर्वाचन आयोग के प्रमुख निर्वाचन आयुक्त डा. अयोधीप्रसाद यादव ने कहा कि नेपाल की प्रजातान्त्रिक अभ्यास में भारत ने हरतरह का सहयोग किया है । निर्वाचन सम्पन्न करने के लिए भारत सरकार की ओर से प्राप्त निर्वाचन संबंधी सामाग्री और सहयोग पर चर्चा करते हुए डा. यादव ने कहा कि निर्वाचन व्यवस्थापन और आवश्यक तालिम के लिए भारत की निर्वाचन आयोग से प्राप्त सहयोग भी अविष्मरणीय है ।

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अध्यक्षीय भाषण तथा स्वागत मन्तव्य व्यक्त करते हुए नेपाल–भारत मैत्री समाज के अध्यक्ष प्रेम लस्करी ने कहा कि नेपाल–भारत बीच सिर्फ दो देशों की नहीं, जनता–जनता बीच आपसी सम्बन्ध है, जिसको कोई भी खत्तम नहीं कर सकता । उनका मानना है कि अब नेपाल–भारत सामाजिक और आर्थिक सहकार्य के साथ आगे बढ़ना चाहिए ।
कार्यक्रम के अवसर पर मैत्री समाज की ओर से निर्वाचन आयोग तथा आयोग के अध्यक्ष डा. अयोधी प्रसाद यादव को सम्मान भी किया गया । साथ में समाज की ओर से विभिन्न सामाजिक संघ–संस्थाओं को कम्प्युटर लगायत सहयोग सामाग्री भी हस्तान्तरण किया गया । कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, पूर्व मन्त्री, पूर्व मुख्य सचिव, सचिव लगायत विशिष्ट व्यक्तित्व की उपस्थिति रही ।

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