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भारतरत्न अटल बिहारी बाजपेयी का निधन से शोक में डूबा संपूर्ण देश

 

{हिमालिनी के लिए मधुरेश प्रियदर्शी की रिपोर्ट} नई दिल्ली —

” हार नहीं मानुंगा रार नहीं ठानुंगा ” जैसी कविताओं के कालजयी रचनाकार, सफल पत्रकार एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी बाजपेयी आज दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा हो गये. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार शाम नई दिल्ली स्थित एम्स में इलाज के दौरान निधन हो गया. एम्स की ओर से जारी बुलेटिन के मुताबिक 93 वर्षीय बाजपेयी ने शाम 05.05 बजे अंतिम सांस ली. एम्स की ओर से कहा गया कि पिछले 36 घंटों में उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी.हमने पूरी कोशिश की पर आज उन्हें बचाया नहीं जा सका. वाजपेयी को यूरिन इन्फेक्शन और किडनी से जुड़ी परेशानी के कारण 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था. डाइवीटीज के शिकार वाजपेयी का एक ही गुर्दा काम कर रहा था.

अटल जी का स्वास्थ्य बुधवार से लगातार बिगड़ते जा रहा था. इससे पहले एम्स ने मेडिकल बुलेटिन जारी कर बताया था कि पूर्व प्रधानमंत्री की तबीयत काफी खराब हो गई है. इसके बाद गुरुवार की सुबह दूसरे मेडिकल बुलेटिन में उनके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं होने की बात कही गई थी. इसके बाद से ही अटल जी को देखने के लिए एम्स में नेताओं का तांता लग गया.
बुधवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनका हालचाल जानने के लिए एम्स पहुंचे थे.इसके बाद वह गुरुवार दोपहर फिर एम्स गए. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी दो बार एम्स पहुंचे. इसके अलावा बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई केंद्रीय मंत्री एम्स पहुंचे. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई विपक्षी दलों के नेता भी पूर्व प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेने गुरुवार को एम्स पहुंचे थे.इससे पहले वाजपेयी के रिश्तेदारों को भी एम्स बुला लिया गया था.

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तीन बार बने प्रधानमंत्री~~~

बीजेपी के संस्थापक अध्यक्ष वाजपेयी 1996 से 1999 के बीच तीन बार पीएम चुने गए. वह पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बने और उनकी सरकार सिर्फ 13 दिनों तक ही चली. 1998 में वह दूसरी बार प्रधानमंत्री बने, तब उनकी सरकार 13 महीने तक चली. 1999 में वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने और 5 वर्षों का कार्यकाल पूरा किया. 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले वह पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री थे.

वे 10 बार लोकसभा के लिए और 2 बार राज्यसभा के लिए चुने गए थे. अटल बिहारी वाजपेयी की लोकप्रियता का आलम यह था कि उनकी पार्टी ही नहीं विपक्षी नेता भी उनकी बातों को तल्लीनता से सुनते थे और उनका सम्मान करते थे.

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2005 में लिया राजनीति से संन्यास~~~

अपनी कविताओं और भाषणों से लोगों को मंत्रमुग्ध करने वाले वाजपेयी स्वास्थ्य खराब होने के कारण सार्वजनिक जीवन से दूर हो गए थे. 2005 में उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया था और तब से वह अपने घर पर ही थे. अटल बिहारी वाजपेयी को कई वर्षों से बोलने और लिखने में भी परेशानी होती थी. वे किसी को पहचान भी नहीं पा रहे थे.

2015 में सामने आई थी आखिरी तस्वीर ~~~

आखिरी बार उनकी तस्वीर साल 2015 में सामने आई थी जब भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उनके आवास पर जाकर उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया था.

डिमेंशिया से पीड़ित थे वाजपेयी ~~~
देश के पूर्व प्रधानमंत्री डिमेंशिया (मनोभ्रांस ) नामक बीमारी से लंबे समय से पीड़ित थे. डिमेंशिया किसी खास बीमारी का नाम नहीं है बल्कि यह ऐसे लक्षणों को कहते हैं जब इंसान की यादाश्त कमजोर हो जाती है और वह अपने रोजमर्रा के काम भी ठीक से नहीं कर पाता. डिमेंशिया से पीड़ित लोगों में शॉर्ट टर्म मेमरी लॉस जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं.ज्यादातर डिमेंशिया के केसों में 60 से 80 प्रतिशत केस अलजाइमर के होते हैं.डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति के मूड में भी बार-बार बदलाव आता रहता है.

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जब UN में सुनाई दी हिंदी की गूंज~~~

1977 में जनता पार्टी की सरकार में अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री थे. उन्हें दुनिया के सबसे बड़े मंच पर भाषण देने का मौका मिला. वाजपेयी के हिंदी में दिए शानदार भाषण से अभिभूत UN के प्रतिनिधियों ने खड़े होकर तालियां बजाईं थीं. वाजपेयी ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का संदेश देते हुए मानवाधिकारों की रक्षा के साथ-साथ रंगभेद जैसे गंभीर मुद्दों का जिक्र किया था.
आज समूचा देश अटल बिहारी बाजपेयी के निधन होने के बाद शोक में डूबा हुआ है. भारत सरकार ने सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है. अंतिम दर्शन के लिए स्वर्गीय बाजपेयी का पार्थिव शरीर उनके घर पर रखा गया है. उनके अंतिम दर्शन के लिए देश के बड़े नेताओं का बाजपेयी आवास पर पहुंचना शुरु हो गया है.कल सुबह उनके शव को भाजपा मुख्यालय ले जाया जाएगा. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के मुताबिक शुक्रवार को एक बजे दिन में उनकी अंतिम यात्रा शुरु होगी. शाम में चार बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

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