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नेपाल एकेडमी द्वारा द्वितीय चीन और दक्षिण एसिया साहित्य सम्मेलन का आयोजन (फोटो सहित)

 

अंशु झा (१५ अक्टुबर, काठमांडू) अन्तर हिमाली सांस्कृतिक एवं साहित्यिक सम्बन्ध प्रवद्र्धन के लिए काठमांडू में साहित्य सम्मेलन आयोजित किया गया । द्वितीय चीन और दक्षिण एसिया साहित्य सम्मेलन–२०७६ के नाम से नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित पांच दिवसीय कार्यक्रम में दक्षिण एसिया के विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधि सहभागी रहे ।
अक्टूबर १५ के दिन प्रज्ञा प्रतिष्ठान काठमांडू में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन प्रमुख अतिथि प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली ने किया । कार्यक्रम में विशेष अतिथि संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्यन मन्त्री योगेश भट्टराई, पाकिस्तानी राजदूत मजहर जावेद, बंगलादेश की राजदूत मासफी विन्ते शाम्स, वांग्मय शताब्दी पुरुष सत्यमोहन जोशी, नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के संगीत तथा नाट्य विभाग के कुलपति नारायणभक्त श्रेष्ठ, भारतीय दुतावास से प्रो. डा. केदारनाथ शर्मा, नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के उपकुलपति डा. जंगमान गुरुंग और नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के उपकुलपति प्रो. जगतप्रसाद उपाध्याय थे ।

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कार्यक्रम में नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के कुलपति गंगाप्रसाद उप्रेति ने अपना स्वागत मन्तव्य रखा । नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के उपकुलपति डा. जगमान गुरुंग ने अतिथियों को बैग प्रदान किया ।
कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए प्रधानमन्त्री ओली ने कहा कि एसिया विश्व का ही उत्कृष्ट महादेश है, जहां से ज्ञान का ज्योति सबसे पहले से प्रारम्भ हुआ था । उन्होंने आगे कहा कि सर्वे भवन्तु सुखिनः पूर्वीय दर्शन में ही है और न्युटन, गैलेलियो इत्यादि वैज्ञानिकों से कई शताब्दी पूर्व ही हमारे पूर्वीय विद्वानों ने यह थ्योरी संसार को दे चुका था । प्रधानमन्त्री का मानना है कि आज विकसित राष्ट्र भी हमारी संस्कृति, आचरण तथा संस्कार को अपनाना चाहते हैं । इसीलिए हमें अपनी वास्तविक सांस्कृतिक, ऐतिहासिकता इत्यादि को लेकर आगे बढना है ।

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प्रधानमन्त्री ओली ने यह भी कहा कि हमारे देश में परिवर्तन तो हुआ है, पर अवस्था में सुधार लाना अभी भी बांकी है । उन्होंने कहा कि फिलहाल हमारा नेपाली समाज के संस्कार नष्ट होते जा रहा है । सामाजिक सन्जाल के द्वारा समाज में विकृति फैल रहा है । पुत्र पिता को आप कहने से खुद को लज्जित महसूस कर रहा है, जो पूर्वीय संस्कार और संस्कृति है । प्रधानमन्त्री जी ने कहा कि हमारा अतीत ऐसा है कि जब लोग हाथ में पत्थर लेकर सिकार कर रहे थे, उस समय हमारे पूर्वज वेद का अविष्कार कर रहे थे ।

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कार्यक्रम में संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्यन मन्त्री योगेश भट्टराई, पाकिस्तानी राजदूत मजहर जावेद, बंगलादेश की राजदूत मासफी विन्ते शाम्स, प्रज्ञा प्रतिष्ठान के सचिव प्रो. जगत प्रसाद उपाध्याय आदि वक्ताओं ने नेपाल, भारत, चीन तथा दक्षिण एसियायी संबंध के विविध आयाम के बारे में चर्चा किए । कार्यक्रम में नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के सदस्यों के साथ–साथ चीन, बंगलादेश, भारत, माल्दिभ्स, पाकिस्तान, श्रीलंका से आए साहित्यकार तथा बुद्धिजीवियों का भी उपस्थिति रहा ।

 

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