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हांगकांग में, आजादी मांग रहे लाखों लोग आए सड़कों पर

 

हांगकांग, एजेंसियां।

हांगकांग के मध्य मुख्य कारोबारी इलाके की धरती पर रविवार को काले रंग की चादर बिछ गई। जिस सड़क पर देखो-उसी से काले कपड़े पहने लोकतंत्र समर्थकों का रेला वहां पहुंच रहा था। बच्चे-बूढ़े और जवान, सभी के मुख से- आजादी के लिए हांगकांग के साथ खड़े हों, का नारा निकल रहा था। आंदोलन के छह महीने पूरे होने पर आयोजित जनसभा में लाखों लोगों ने हिस्सा लिया। यह हाल के महीनों का सबसे बड़ा जमावड़ा था। पुलिस भी वक्त की नजाकत को समझ रही थी। संयम बरतने का एलान उसने पहले ही कर रखा था। इस दौरान हथियार लेकर आ रहे 11 लोग गिरफ्तार हुए।

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हाल के निकाय चुनाव में लोकतंत्र समर्थकों को मिली बड़ी सफलता ने जाहिर कर दिया है कि हांगकांग क्या चाहता है। इसी के कारण पॉलीटेक्निक विश्वविद्यालय में अड्डा जमाए हजारों आंदोलनकारियों को खदेड़ने के कुछ ही दिन बाद पुलिस ने अपना रुख बदला है।

स्थानीय सरकार पर बना दबाव

आंदोलन को मिल रहे अंतरराष्ट्रीय समर्थन को देखते हुए स्थानीय सरकार पर दबाव बन गया है कि आंदोलन से वह सतर्कता और शांतिपूर्ण ढंग से निपटे। जनसभा के दौरान हांगकांग की चीन समर्थित सरकार के प्रति लोगों का गुस्सा साफ दिखाई दिया। जुलूस में शामिल होकर सभास्थल पहुंचे 50 वर्षीय वांग का कहना था कि हम अलग-अलग तरीके से अपना मंतव्य व्यक्त कर रहे हैं। कुछ लोग सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं, कुछ विदेशों में हमारी आवाज उठा रहे हैं और कुछ चुनाव के जरिये लोकतंत्र की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार हमारी आवाज नहीं सुन रही। वह सिर्फ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का आदेश मान रही है। हम अपनी मांग को लेकर आगे बढ़ना जारी रखेंगे।

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विक्टोरिया पार्क से जुलूस में अपने बच्चे के साथ काले कपड़ों में आई 40 वर्षीय महिला ने कहा जब तक उसमें जान है-तब तक वह हांगकांग की आजादी की लड़ाई लड़ेगी। आज हांगकांग के साथ हर कोई खड़ा है- अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी।

छह महीने पुराना यह आंदोलन आज भी नेतृत्व विहीन है। आंदोलन के लिए लोग ऑनलाइन अपील पर संगठित होते हैं और सड़कों पर आ जाते हैं। इसके चलते सरकार के लिए मुश्किल है कि वह आंदोलन से निपटने के लिए किसे घेरे और किसे पकड़े। बच्चे से लेकर बूढ़े तक, हर कोई इस आंदोलन से जुड़ा है।

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