8
September , 2010
Wednesday

सम्पादक की कलम से …

Posted by Himalini On January - 8 - 2010
Print This News Print This News

DSC01982_r1_c1नेपाल और भारत के बीच प्रत्यक्ष सम्बन्ध त्रेता युग के मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और आद्या शक्ति माँ जानकी के वैवाहिक सम्बन्ध से स्थापित है । उसी समय से इन दोनों देशों के बीच अटूट रुप से उक्त सम्बन्ध अद्यावधि प्रगाढÞ होता आ रहा है । इस सम्बन्ध को प्रगाढ करने का काम केवल नेपाल और भारत के सीमान्त प्रदेशों में रहने वाली तर्राई वासी जनता ही नहीं अपितु इन दोनों देशों के राजा-महाराजा भी वैवाहिक सम्बन्ध परम्परा की कडी को मजबूत करते आ रहे हैं । इन दोनों देशों के बीच मात्र यही सम्बन्ध नहीं है । दोनों के बीच भौगोलिक, सामाजिक, धार्मिक, भाषिक, सामरिक और आर्थिक सम्बन्ध भी अटूट हैं । इन्हीं सब कारणों से नेपाल-भारत के बीच बेटी-रोटी का रिश्ता है । जिसे तोड पाना किसी भी प्रतिवेदन के वश की बात नहीं है । फिर भी नेपाल में पंचायत काल से आज तक शासन करते आ रहे पर्वतीय मूल के अदूरदर्शी राजनेता लोग अपने संकरीण् विचारों के आधार पर इसे तोडने की कोशिश करते आ रहे हैं । उसी कोशिश को शख्त और अधिक बाधक बनाने के लिए संसद में संविधान सभा की मौलिक अधिकार तथा निर्देशक सिद्धान्त समिति के द्वारा जो प्रतिवेदन लाया जा रहा है वह निश्चय ही मधेशी जनता को अधिकारहीन बनाने के साथ-साथ तर्राईवासियों का सम्बन्ध भारत के साथ अच्छा न रहे इसके लिए सोची समझी कूटनीति है । क्योंकि भारत के साथ तर्राईवासियों का सदियों पुराना सांस्कृतिक सम्बन्ध प्रत्यक्ष रुप से प्रभावित होगा । ऐसा होने से भारत के प्रति तर्राईवासियों के मन में व्याप्त भावनात्मक निकटता खण्डित होगी । दोनों देशों के बीच विद्यमान सुसम्बन्ध स्थापित नहीं रह पाएगा, यह उक्ति पर्ण्तः चरितार्थ होगी कि, न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी । लेकिन गोर्खाली शासकों को समझना होगा कि तर्राई की जनता भी २१ वीं सदी की जनता है । वहं की जनता भी जागरुक हो गई है और अधिकार प्राप्त करने की शक्ति को समझने लगी है ऐसी स्थिति में खस् शासकों द्वारा लाये गए नागरिकता प्रतिवेदन को भविष्य में पारित कराने की कोशिश की गयी तो परिणाम त्रासदीपर्ण् हो सकते हैं जिसके लिए मुख्य रुप से राज करते आ रहे खस् शासक ही जिम्मेबार समझे जाएंगे ।

कोई भी देश, समाज या रिश्ता तभी जीवित रहेगा, जब हमारी धरती सुरक्षित रहेगी । किन्तु पर्यावरण की सुरक्षा एवं जलवायु परिवर्तन से हो रहे दुष्परिणामों की चिंता न करते हुए अमीर एवं विकासशील देश साफ तौर पर दो भागों में बंट गए । और उनके औद्योगिक कारोबारी उद्देश्य अहम् बन गए ऐसी स्थिति में न हमारी धरती बचेगी और धरती के नहीं बचने पर देश, समाज, रिश्तों के बचने की कल्पना कैसे की जा सकती है । हाल ही में जलवायु परिवर्त्तन पर डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगेन में सम्पन्न महासम्मेलन में जुटे १९२ देशों की बहस किसी गंभीर मसले पर न होकर अपने क्षुद्र राजनीति की झलक पेश करती है । महासम्मेलन में ग्रीन हाऊस गैंसों के उर्त्र्सजन में कटौती तथा जलवायु परिवर्त्तन से उत्पन्न होनेवाले खतरों से निपटने के लिए एक कारगर रणनीति बनने एवं उसपर र्सार्थक सामूहिक कार्यान्वयन होने की पूरी उम्मीद थी, परन्तु दर्ुभाग्वश ऐसा नहीं हो सका । इस ज्वलन्त मुद्दे पर नेपाल सरकार भी कम चिन्तित नहीं है, इसी चिन्ता को दुनिया के सामने लाने के लिए नेपाल सरकार ने सर्वोच्च सगरमाथा के आधार शिविर -काला पत्थर) पर पहुँचकर मन्त्रिपरिषद की ऐतिहासिक बैठक की । इस बैठक के माध्यम से नेपाल ने कोपेनहेगेन में होने वाले जलवायु परिवर्त्तन सम्बन्धी सम्मेलन का ध्यान अपनी ओर खींचा । साथ ही इस कालापत्थर बैठक ने विश्व का ध्यानाकर्षा किया है कि बडे-बडे औद्योगिक देशों के द्वारा किये जा रहे हरित गृह गैंस उर्त्र्सजन से होने वाले जलवायु परिवर्तन के कारण हिमाली क्षेत्र भी दुष्प्रभावित हो रहा है । अतः यह नेपाल जैसे प्रभावित और निर्धन देश के प्रति भी औद्यागिक बडे देशों को जिम्मेवार बनने का संकेत देता है । प्रधानमंत्री माधवकुमार नेपाल ने विश्व स्तरीय कोपेनहेगेन सम्मेलन में हरित गृह गैस कटौती का जो महत्वाकांक्षा प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, अगर सम्मेलन सफल होता और माधवकुमार नेपाल द्वारा सुझाए गए प्रस्ताव को अमली जामा पहनाया गया होता तो जलवायु परिवर्त्तन के खतरों को कापी हद तक कम किया जा सकता था । प्रधानमंत्री अपने इस उद्देश्य को विश्व समुदाय के समक्ष रखने मे सफल रहे कि नेपाल जैसे छोटे देश को भी जलवायु परिवर्त्तन के दुष्परिणामस्वरुप उत्पन्न होने वाले भावी खतरों की विशेष चिन्ता है । खैर बहुचर्चित कोपेनहेगेन सम्मेलन तो सफल नहीं रहा, इसका मतलब यह नहीं कि विश्व के हम सभी नागरिक हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें ।

You can leave a response, or trackback from your own site.

Leave a Reply




CAPTCHA image

Featured Video

lATEST iSSUE

Copyright © 2008 Himalini.Com All Right Rederved.

Developed by: Web Design Nepal ~ Himalayan Web Information Pvt. Ltd.