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पर्यटन वर्ष पर नोवल कोरोना भाइरस का असर : अंशु झा

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हिमालिनी, अंक फरवरी 2020,नेपाल प्राकृतिक सुन्दरता से परिपूर्ण होने के साथ साथ भौगोलिक विकटता से घिरा हुआ देश भी है । नेपालं हिमाल, पहाड़ और तराई क्षेत्र का सम्मिश्रण है । जिसमें तराई क्षेत्र का भ्रमण तो आसानी से किया जा सकता है, फिर भी तराई के बहुत सारे भाग यातायात से वंचित है । क्योंकि तराई में भी बहुत सारे ऐसे गांव है जहां सडक का निर्माण नहीं हो पाया है, जिससे वहां की जनता को देश के अन्य नागरिकों की तरह हर सुविधा प्राप्त नहीं हो रही है । आप सोच सकते हैं, जब तराई क्षेत्र जो कि समतल है वहां यात्रा करने के लिये समस्या होती है तो पहाड़ और हिमाल की यात्रा करना कितना मुश्किल है ।

नेपाल सरकार ने अपने देश को सुखी तथा समृद्ध बनाने के लिये २०२० साल को पर्यटन वर्ष के रूप में घोषित किया है । सरकार का मानना है कि देश में जितने पर्यटकों का आगमन होगा, देश का अर्थतन्त्र उतना ही सबल होगा । व्यवसाईयों के व्यापार में वृद्धि होगी । लोगों को रोजगार मिलेगा । इन्हीं सारी बातों को ध्यान में रखते हुये २०२० को पर्यटन वर्ष के रूप मनाना शुरु किया गया । सभी जनता में सचेतना फैलाया गया जो जहां से है वहीं से पर्यटन वर्ष का प्रचार प्रसार करें । ग्रामीण स्तर से लेकर शहरों तक विभिन्न ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक स्थलों का प्रचार किया जाय ताकि पर्यटक वर्ष सफल हो सके । मगर अफसोस, पर्यटन वर्ष के प्रारम्भ माह में ही पर्यटन वर्ष को प्रभावित करने वाला विविध तत्वों का आगमन हो गया ।

सर्वप्रथम पर्यटन वर्ष को प्रभावित करने में यहां की भौगोलिक विकटता है । तत्पश्चात सरकार की कमजोरी और लापरवाही भी है । देश में बहुत सी ऐसी धार्मिक, ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक स्थलें हैं जिससे अपने देश के व्यक्ति भी अपरिचित है तो दूसरे देश के पर्यटकों को वहां तक कौन पहुंचायेगा ? जिसका मुख्य कारण है यातायात का अभाव । पर्यटन वर्ष के प्रारम्भ में ही अन्न्पूर्ण क्षेत्र में हिमस्खलन के कारण चार कोरियाली के साथ साथ अन्य सात व्यक्ति लापता हैं । उसके बाद आठ भारतीय पर्यटकों का मकवानपुर के दामन में मृत्यु होना जो नेपाल के पर्यटन वर्ष के लिये दुर्भाग्य रहा और अपशगुन भी । नेपाल सरकार को लग रहा था कि इसबार का पर्यटन वर्ष चीन के पर्यटकों द्वारा सफल होगा क्योंकि चीन से अत्यधिक पर्यटक नेपाल प्रवेश करने की सम्भावना थी । पत्रकारों को चाइनीज भाषा की प्रशिक्षण देने की कार्यक्रम भी जारी है ताकि पत्रकारों द्वारा चिनियां पर्यटकों को नेपाल से सम्बन्धित सभी विषय वस्तु को प्रस्तुत करने में कोई कमी न रह जाय । पर दुर्भाग्य तो देखिये, नोवल कोरोना भाइरस की उत्पति ने नेपाल के पर्यटन वर्ष को प्रभावित कर दिया ।

जी हां, नोवल कोरोना भाइरस की उत्पति चीन से हुई है । यह भाइरस चमगादड़ और सर्प में पाया जाता है । बताया जा रहा है किसी व्यक्ति द्वारा चमगादड़ या सर्प को भोजन के रूप में ग्रहण करने पर उस व्यक्ति में यह भाइरस आया होगा । यह भाइरस अत्यन्त ही घातक और जानलेवा है । इस भाइरस का संक्रमण बहुत ही तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल रहा है । चीन के स्वास्थ्यमन्त्री मा सियाओवेई ने बताया कि इस नया भाइरस में एक से दूसरे में फैलने की क्षमता अत्यधिक है जिससे इसको नियन्त्रण में लेने में बहुत कठिनाई हो रही है । यह रोग गत वर्ष के अन्त में चीन के हुबेई प्रान्त के वुहान से निकला जिसके संक्रमण का वृद्धिदर व्यापक रूप धारण कर लिया । वैसे तो चीन में इससे पहले सन् २००२ से २००३ तक महामारी के रूप में सार्स नाम का संक्रमण फैला था जिसमें ८ सौ व्यक्ति की मृत्यु हुई थी । यह कोरोना भाइरस उससे कहीं कम है । दुख की बात है कि इस रोग के कारण चीन इसबार नया वर्ष भी नहीं मना पाया । प्रशासन द्वारा पर्यटकीय स्थल के साथ साथ अन्य क्षेत्रों को भी बन्द कर दिया गया है ।

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नेपाल भ्रमण वर्ष २०२० में वार्षिक २० लाख पर्यटक लाने का लक्ष्य था । जिसमें सबसे अधिक भूमिका चीन और भारत से आने वाले पर्यटकों की होती है । परन्तु वर्ष के शुरुआत में ही फैला कोरोना नेपाल आने वाले पर्यटकों के लिये व्यारियर खड़ा कर दिया है । सन् २०१९ में भारत से २ लाख ५४ हजार १ सौ ५० व्यक्ति सिर्फ जहाज से नेपाल भ्रमण के लिये आये थे । उसी प्रकार चीन से १ लाख ६८ हजार ५ सौ ४३ पर्यटक नेपाल भ्रमण के लिये आये थे । नेपाल का लगभग एक तिहाई पर्यटक पड़ोसी दो राष्ट्र पर निर्भर है । परन्तु कोरोना भाइरस के कारण चीन से नेपाल आने वाले चीनी पर्यटकों का आगमन २०२० में कम रहने की सम्भावना देखा जा रहा है । वैसे तो चीन ने प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुये कहा है कि भ्रमण वर्ष के लिये सरकारी स्तर से सहयोग करेंगे । चीन के राजदूत भी अपनी प्रतिबद्धता उल्ल्ेख करते हुये कहा है कि नेपाल भ्रमण वर्ष को सफल बनायेंगे । पर क्या इस प्रकार के विश्वव्यापी संकट कोरोना संक्रमण फैल रहे अवस्था में इस प्रतिबद्धता को व्यवहार में लाना सही रहेगा ?

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जनवरी महीना में कितने पर्यटक नेपाल आये हैं इस सम्बन्ध में अध्यागमन विभाग द्वारा आधिकारिक तथ्यांक सार्वजनिक नहीं किया गया है । पर सरकार भी विश्वस्त हो गये हैं कि कोरोना के कारण आगामी दिनों में चीनी नागरिक का आवागमन कम होगा जिससे समग्र भ्रमण वर्ष अभियान प्रभावित होगा । प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली ने सार्वजनिक समारोह में बताया कि पर्यटन वर्ष को कोरोना जैसी बुरी नजर लग चुकी है । चीन के साथ साथ विश्व के बहुत सारे देशों में कोरोना संक्रमण से बचने के लिये अभ्यास जारी है । ऐसे समय में भला कौन घूमने निकलेगा ?

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समग्र में नेपाल सरकार को पर्यटन वर्ष को सफल बनाने के लिये अब बहुत ही धैर्य तथा सावधानी की आवश्यकता है । सबसे पहले जनमानस में फैले त्रास को दूर करना होगा । पर्यटन क्षेत्र के सरोकार वाला को फिलहाल सबसे अधिक डर सामाजिक सन्जाल द्वारा फैले अफवाह से है । सामाजिक सन्जाल के माध्यम से ही नेपाल कोरोना भाइरस से सुरक्षित होने का सूचना प्रवाह करना होगा । नेपाल में इस रोग प्रति सचेतना अपनाया जा चुका है इत्यादि खबर से पर्यटन वर्ष सफल होने का सपना साकार हो सकता है । इसी प्रकार सरकार को पर्यटक वर्ष सफल बनाने के लिये अन्य विकल्प भी ढूंढना होगा । चिनियां पर्यटकों का अभाव अन्य देशों के पर्यटकों से पूरा करना होगा ताकी पर्यटन वर्ष का लक्ष्य पूर्ण हो सके ।

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