नेपाल में पर्यटन उद्योग धड़ाम, सीमा पर सन्नाटा
कोरोना वायरस का प्रभाव नेपाल पर भारी पडऩे लगा है। विदेशी नागरिकों के नेपाल प्रवेश पर प्रतिबंध के बाद वहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर वीरानी छाई है। इसका असर नेपाल सीमा से लगे भारत के सोनौली क्षेत्र में भी पड़ा है। पर्यटक न आने से होटल व्यवसायी मायूस हैं। सीमा से संचालित होने वाले पर्यटन वाहनों के पहिए भी थम गए हैं। पर्यटन उद्योग पर आधारित नेपाल की अर्थ व्यवस्था पर भी कोरोना संकट का असर पडऩे की आशंका जताई जा रही है। नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर, पोखरा व लुंबिनी आदि स्थानों पर दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक सोनौली के रास्ते नेपाल जाते हैं। पर्यटकों को रहने के लिए सोनौली व नेपाल के बेलहिया, भैरहवा व बुटवल में होटल भी बनाए गए हैं। इस क्षेत्र में पेइंग गेस्ट के रूप में घरों में भी पर्यटकों को रखने का भी चलन है। मार्च माह में यहां के जिन होटलों में नोरूम के बोर्ड चस्पा होते थे, वहां कर्मचारियों को छोड़कर कोई नजर नहीं आ रहा है।
बेलहिया स्थित एक होटल मैनेजर राजीव गोस्वामी ने बताया कि सबसे अधिक नुकसान भारत-नेपाल की सीमा सील होने की अफवाह से हुआ है। 15 मार्च के बाद गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक व तमिलनाडु के 46 पर्यटक जत्थे ने होटलों की बुकिंक रद्द कराई है। सोनौली निवासी व टूर एंड ट्रैवेल एजेंसी के प्रोपराइटर संदीप रौनियार का कहना है कि 13 मार्च से भारतीयों ने अपनी टिकट व होटल के कमरों की बुङ्क्षकग रद्द करनी आरंभ कर दी है। अब तक 23 समूहों ने नेपाल यात्रा रद्द की है। जिससे उनका कारोबार ठप हो गया है। बेलहिया स्थित एक होटल के रिशेप्सन कर्मचारी रवि सिजारी ने बताया कि बीते दो दिनों में भारतीय पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। कोरोना वायरस के चलते नेपाल में कोई नहीं आ रहा है। नेपाल के बेलहिया स्थित एक होटल के मैनेजर भरत वर्मा का कहना है कि उनका पूरा कारोबार भारतीय पर्यटकों के सहारे है। लेकिन 15 मार्च के बाद फैली सीमा सील होने की अफवाह के बाद भारतीय पर्यटकों के फोन आने लगे। लगभग सभी अपने बुक किए गए होटल व नेपाल यात्रा के टिकट कैंसिल करा लिए हैं।

