सीमा में फसे हुए लोगों के लिए अब सीमा नहीं खुलेगी, जो जहां हैं, वह वही रहेंगे
काठमांडू, ३१ मार्च । कोरोना वायरस रोकथाम एवं नियन्त्रण के लिए आज पूरे विश्व में लकडाउन घोषणा की गई है । जिसके चलते लाखों नागरिक विदेशी भूमि में बंदी जीवन जी रहे है, जो अपने देश वापस होना चाहते हैं । नेपाल और भारत के बीच भी ऐसी ही स्थिति हैं । रोजगारी के लिए भारत पहुँचे हजारों लोग नेपाल–भारत सीमा में फसे हैं, जो नेपाल आना चाहते हैं । इधर नेपाल में भी कुछ भारतीय नागरिक हैं, जो भारत वापस होना चाहते हैं ।
ऐसी ही पुष्ठभूमि में सरकार ने निर्णय किया है कि अब फसे हुए लोगों के लिए सीमा क्षेत्र नहीं खुलेगी, जो जहां हैं, उन लोगों को वही रहना होगा । हां, प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली के परराष्ट्र मामिला सल्लाहकार डा. राजन भट्टराई ने कहा है कि दोनों देशों की उच्चस्तरीय और स्थानीय सरकार के बीच सम्पन्न विचार–विमर्श के बाद ऐसा निर्णय हुआ है । उनका कहना है कि सीमा पर फसे हुए लोगों को सीमा क्षेत्र में ही एक अलग ही क्वारेन्टाइन निर्माण किया जाएगा और उन लोगों को वही रखा जाएगा और उन लोगों की व्यवस्थापन संबंधित देशों की ओर से ही किया जाएगा ।
तीव्र गति से फैल रहा कोरोना वायरस को दृष्टिगत कर ऐसा निर्णय हुआ है, जिसकी कार्यान्वयन से वायरस फैलने की संभावना कम होती है । डा. भट्टराई ने कहा है कि पिछली बार हुए सहमति अनुसार भारत में फसे हुए नागरिकों की व्यवस्थापन भारत सरकार की ओर से होगी और नेपाल में फसे हुए भारतीय नागरिकों की व्यवस्थापन नेपाल सरकार की ओर से होगी । इसके लिए संबंधित सीमा क्षेत्रों में ही क्वारेन्टाइन भी निर्माण किया जा सकता है ।
डा. भट्टराई ने यह भी कहा है कि कैलाली और धाचुर्ला स्थित सीमा क्षेत्र में फसे हुए नेपाली नागरिकों के लिए भारत की ओर से व्यावस्थापन प्रक्रिया भी शुरु हो चुकी है । सरकार को यह भी कहना है, मलेसियाल, दुबई, कतार जैसे खाडी देश हो या युरोप, अमेरिका, अस्ट्रेलिया जैसे विकसित देश, कहीं से भी नेपाल आनेवाले नेपाली नागरिकों को लाना संभव और व्यवहारिक नहीं है । वायरस संक्रमण की दृष्टिकोण से भी इसको जोखिमपूर्ण नजर से देखा जा रहा है ।

