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विन्ध्वासिनी का झगड़ा और मेरा विश्लेषण : मुकेश द्विवेदी

 

 बीरगंज,२०७६ चैत्र २० गते विहिवार । बिरगंज महानगरपालिका वार्ड नंबर 19 में विन्ध्वासिनी की घटना के बारे में सुनकर बहुत दुख हुआ।विन्ध्वासिनी का झगड़ा राहत वितरण के लिए नहीं, राहत के लिए नाम संग्रह के लिए विवाद है और जैसा कि मैं इसे समझता हूं, सामान्य मुद्दे पर बहुत विवाद हुआ है।

विवाद से एक दिन पहले मेयर साहब की अध्यक्षता में  बैठक हुई, जिसमे हरेक वार्ड में सर्वदलीय समिति बनाई गई थी, जो सभी वार्ड में आर्थिक रूप से गरीब लोग, जिनके पास भूखे रहने के आलावा कोई विकल्प नहीं है, वैसे लोगो को सामूहिक सलाह और सुझावों के आधार पर नाम एकत्र करने का निर्णय किया गया था। अगले कुछ दिनों के लिए राहत प्रदान करने के लिए, तत्काल बिपद ब्यवस्थापन द्वारा, प्रत्येक वार्ड की आबादी और क्षेत्र के आधार पर  पर 1 लाख से 4.5 लाख तक का रकम, बहुत ही पारदर्शी तरीके से आवंटित किया गया है। मैं बहुत खुश था कि मेयर साहब ने पक्ष-बिपक्ष का भेद नहीं करके, सभी की बात सुनकर, सभी को स्वीकार्य निर्णय किया। मेरे साथ हर किसी ने इस कदम का स्वागत किया।

मुझे सुबह 9 बजे के आसपास फोन आया कि विन्ध्वासिनी में राहत वितरण के नामावली संकलन के मुद्दे पर विवाद हुआ है आर झगड़ा में सिर भी फूटा है। मै आश्चर्यचकित होकर मेयर साहब को फोन किया, हमेशा  की तरह उन्होंने तुरंत फोन उठाया और बोले “हम जानते हैं मुकेश जी, सिर फूटा है, मै तुरंत वार्ड अध्यक्ष से बात कर रहा हूं”। मै कुछ देर के लिए सोच में पड़ गया की, कल कितना सूंदर निर्णय हुआ था,  जिसमे सबके सहमति से मिलकर कार्य करने का बोर्ड का निर्णय हुआ था और आज ये क्या हो गया ?

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फिर मुझे याद आने लगा कि इससे पहले भी, मैं और मेयर साहब बहुत बार राहत बाटने गए है, यह तक की हमलोगो के बनाए कार्यतालिका अनुसार, मेयर साहब राहत बाटने गए, मेयर बनने से पहले भी गए। जिस समय बड़ी बाढ़ ने तांडव मचाया या सर्दी के दौरान कंबल बाटने का समय हो, अनगिनत बार गया। इन सब से मै कह सकता हु की राहत बाटने के बारे में मुझे अच्छा अनुभव है। ये मेरा घमंड नहीं, मेरा स्वतंत्र विचार है जिसे मै लिख रहा हु।

राहत बाटने के समय, मैंने महसूस किया कि गरीब, असहाय छूट जाते है और सम्पन्न लोग राहत के लिए लड़ते थे, यहां तक कि पैंट, शर्ट, साडी, दो तोला का गहना लगाए लोग सबसे पहले राहत लेने आते है और गरीब पीछे छूट जाते है। वैसे तो ये मधेश की आदत ही है। कई बार मेयर साहब के पहुंचने से पहले हमलोग पहुंचकर चेक करते है, जिसमे पातेे है की हमे संख्या बताया जाता है, वितरण के समय दोगुने लोग पहुंचते हैं और कितनी बार हमें कार्यक्रम रद्द करना पड़ता है। मुझे ऐसा लगा की राहत के लिए जितना भी रकम विनियोजित कर दिया जाए वो कम ही पड़ेगा।

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फिर मुझे चिंता होने लगी की अन्य वार्डों में ऐसा तो नहीं है, दो बजने तक में दो- तीन वार्ड से ऐसे ही फोन आने लगे जिसमे कहा गया की सर्वदलिए समिति की बात को नहीं माना जा रहा, वड़ा अध्यक्ष ने कहा खुद उनके लोगो का लिस्ट ही ज्यादा है अन्य को कैसे समावेश करे, आपलोगो को जहां जाना है जाओ। मेयर साहब से मिलने के लिए फोन आने शुरू हो गए। अब विन्ध्वासिनी का झगड़ा दूसरे वार्ड में नहीं हो, इसकी कामना करने लगा। इसके बाद पार्टी के जिला अध्यक्षों से आग्रह है की जो जहां जीते हैं, वे स्वयं अपने वार्ड अध्यक्ष द्वारा राहत वितरण करवाए, नहीं तो ये झगड़ा कोरोना वाइरस की तरह दूसरे वार्ड में भी फ़ैल सकता है।

अंत में, मैं मेयर साहब का उल्लेख करना चाहूंगा कि पहली बार मेयर साहब को, हमलोगो को बग़ैर,, वार्ड अध्यक्ष द्वारा तैयार लिस्ट को नगर पुलिस के साथ स्वयं राहत बाटने निकलना पड़ा, शायद ये नेपाल के पहले मेयर होंगे जो खुद राहत लेकर जनता के घर-घर पहुंच रहे है। उनके इस कदम का स्वागत होना चाहिए, क्योकि कुछ व्यक्ति है,जिसे सुबह से रात तक मेयर की कमी ही दिखती है, उन्हें मेयर का काम पसंद नहीं आता और वे नकारात्मक टिप्पणी लिखते और लिखवाते है उन जैसे गपोड़ियो की बाते ना सुनकर मेयर अपना कर्तव्य पूरा कर रहे है।

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जब उनके नकारात्मक व्यग्य से कुछ नहीं हुआ तो कुछ कार्यपालिका के सदस्य भी सामाजिक संजाल में लिख रहे है की मेयर साहब भोट बनाने के लिर राहत लेकर जा रहे है, उनलोगो में जरा भी समझ होती तो वे सोचते की भोट बनाना होता तो पार्टी के वे पार्टी के नेता-कार्यकर्त्ता-हमलोग जैसो को लेकर जाते। कोई मुझपर भी आरोप ना लगे इसलिए उनका राजनितिक सलाहकार होने के वावजूद मुझे साथ जाने का दबाव नहीं बनाए।  अंत में मै मेयर साहब को इतना ही कहूंगा ऐसे ही लोग जब भगवान राम और सीता के नहीं हुए तो फिर किसके होंगे। ऐसे लोगो को चिल्लाने दीजिए और आप उच्च मनोबल के साथ आगे बढ़िए हमसब आपके साथ है।

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