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लकडाउन में महिला का दायित्व : अंशु झा

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अंशु झा, काठमांडू 2 अप्रैल, 2020। चीन के वुहान से निकला कोरोना वाइरस (कोभिड १९) ने संसार भर अपना आधिपत्य कायम कर लिया है । जिस कोरोना वाइरस के त्रास से संसार की गति रुक गई है । लोग अपने घरों में कैद होकर रह गया है । जो विकसित देश विज्ञान के विकास पर इठलाते थे और यह समझते थे कि संसार हमारे मुट्ठी में है वही देश इस कोरोना वाइरस के फैलाव पर नियन्त्रण करने के लिये असमर्थ हैं । जिस कारण संसार के लगभग २ सौ देशों में लकडाउन प्रणाली को अपनाया गया है । लकडाउन अर्थात प्रत्येक व्यक्ति अपने आपको घरों में कैद कर लें । बाहर नहीं निकले । क्योंकि अनुसन्धान के अनुसार यह खतरनाक कोरोना वाइरस व्यक्ति के सम्पर्क से ही एक दूसरे में फैलता है ।
लकडाउन के कारण विद्यालय, विश्वविद्यालय, उद्योग धन्धा के साथ साथ विभिन्न कार्यलय बन्द है । जिसके फलश्वरुप लोग अपने अपने घरों में रह रहें हैं । इस लकडाउन के  कारण निम्नवर्गीय तथा विपन्न परिवारों को अत्यधिक कष्ट झेलना पड रहा है । वैसे तो अमिर लोग भी इस लकडाउन के कारण प्रभावित हुये हैं । पर क्या कर सकते हैं ? यह लकडाउन प्रणाली किसी राजनीतिक उथल पुथल के कारण नहीं हुआ है न किसी आर्थिक दबाब के कारण हुआ है । यह तो कोरोना वाइरस के संक्रमण से होने वाले महामारी से बचने के लिये लकडाउन लगाया गया है ताकि जनता को सुरक्षित रखा जा सके । यह महामारी कोई नई नहीं है, विगत में विश्व ने बहुत सारे इससे भी भयानक महामारी को झेल चुका है । वर्तमान में कोरोना वाइरस का संक्रमण जगत् में तहलका मचा रखा है । इसी को नियन्त्रण के लिये सरकार ने लकडाउन लगाया है । इस लकडाउन से वैसे तो सबलोग प्रभावित हैं पर सबसे अधिक महिला प्रभावित दिखाई दे रही है ।
जी हां, जब जब भी संसार को किसी समस्या से जुझना होता है तो उसमें महिला का स्थान अग्रणी में होता है क्योंकि महिला में पुरुष और बच्चों से ज्यादा सहनशक्ति होती है । अब बात आती है लकडाउन की तो लगभग प्रत्येक घरों से सोसल मिडिया द्वारा या टेलिफोन की वार्ता से यही बात सामने आ रही है कि महिला के ऊपर इस लकडाउन में कुछ ज्यादा ही भार बढ गया है । पुरुषप्रधान समाज में महिला प्रायशः घर में होती है और पुरुषवर्ग बाहर काम के लिये निकलते हैं । और अर्थ का व्यवस्था कर घर लाते हैं परन्तु घर का और अन्य इन्तजामात महिला ही करती है । चाहे राशन लाना हो या साग सब्जी । घर का हरेक काम महिला के हाथ में ही होता है । वैसे तो पहले से ही महिला के ऊपर पुरुषों के अपेक्षा काम का भार अधिक होता है पर इस लकडाउन के कारण और ज्यादा बढ गया है । इस लकडाउन में पुरुष घर से बाहर निकल नहीं पा रहे जिसका झुंझलाहट महिला पर ही निकाल रहे, बच्चे स्कूल नहीं जा पाते जिससे वह मां पर ही अपनी व्यग्रता दिखा रहे । महिला को अपने पति व बच्चे को खुश रखने के लिये किचन में विभिन्न परिकार का आयोजन करना पड रहा है । ताकि बच्चे और पति प्रसन्नचित रहे ।
सही मायने में महिला बहुत बहादुर होती है । किसी भी समस्या में महिला अपने आपको नियन्त्रित कर अपने परिवार को भी संरक्षित कर रखती है । फिलहाल महिला का दायित्व अचानक बढ गया है । कोरोना वाइरस के संक्रमण से अपने पति व बच्चों को सुरक्षित रखने के लिये महिला किसी भी हद तक जा सकती है । प्रत्येक महिला का यही उद्देश्य होता है कि वह अपने परिवार को सुरक्षित रख सके । उसके परिवार पर किसी भी प्रकार का मुसिबत न आए । अगर हरेक महिलाओं का इस प्रकार का सोच हो तो कोरोना वाइरस पर विजय पाना असम्भव नहीं है ।
समग्र में महिला को विगत के इतिहास की तरह ही इस खतरनाक कोरोना वाइरस से सुरक्षित रहने के लिये सजग रहना चाहिये । अपनी सूझबूझ व चातुर्य का प्रयोग कर अपने परिवार तथा समाज को सुरक्षित रखना चाहिये । महिला का स्थान सभी युगों में सदैव उच्च है । इस मुसिबत की घडी में भी अपना स्थान बरकरार रखें और इस रोग का प्रतिकार करें ।

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