सत्ताधारी पार्टी नेकपा विभाजन की ओर, प्रधानमन्त्री ओली द्वारा पार्टी विभाजन संबंधी अध्यादेश पेश
काठमांडू, २० अप्रील । देश कोरोना वायरस से सिर्जित परिस्थिति से मुकाबला कर रही है । लेकिन इसी बीच सत्तारुढ दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी विभाजन की ओर केन्द्रीत हो गई है । पिछली बार पार्टी अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड ने कोरोना वायरस विरुद्ध लड़ने के लिए सर्वपक्षीय उच्चस्तरीय राजनीतिक संयन्त्र निर्माण संबंधी प्रस्ताव लाए थे । उक्त प्रस्ताव को लेकर नेकपा के भीतर तीव्र ध्रुवीकरण हो रही है । विशेषतः प्रधानमन्त्री भी रहे दूसरे पार्टी अध्यक्ष केपीशर्मा ओली उच्चस्तरीय संयन्त्र के विरुद्ध में हैं । उनके पक्षधर कई नेताओं ने ओली का साथ दिया है । इसी विषय को लेकर प्रधानमन्त्री ओली और प्रचण्ड के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ती जा रही है ।
ऐसी ही पुष्ठभूमि में सरकार ने पार्टी विभाजन संबंधी नया अध्यादेश लाने की तैयारी की है, जिसको लेकर पार्टी के भीतर और पूरी राजनीतिक वृत्त में बहस होने लगी है कि अब नेकपा में विभाजन निश्चित है । सोमबार सम्पन्न मन्त्रिपरिषद् बैठक ने वर्तमान कानून में संशोधन कर राजनीतिक दल विभाजन संबंधी प्रावधान में लचकता अपनाने का निर्णय लिया है । इसके लिए अध्यादेश लाने के लिए मन्त्रिपरिषद् में विचार–विमर्श हुई है ।
वर्तमान कानूनी व्यवस्था अनुसार किसी भी पार्टी में विभाजन होती है तो उसको कानूनी मान्यता तब ही प्राप्त हो सकती है, जब विभाजित पार्टी के साथ मूल पार्टी में प्रतिनिधित्व कर रहे संसदीय दल और केन्द्रीय मिमिटी में रहे ४० प्रतिशत नेता हो । अर्थात् पार्टी विभाजन के लिए मूल पार्टी से कम से कम ४० प्रतिशत सांसद् और केन्द्रीय सदस्य विभाजित नयां पार्टी में होना अनिवार्य है । लेकिन अध्यादेश द्वारा व्यवस्थित नयां कानून अनुसार अब केन्द्रीय समिति सदस्य और संसदीय दल, जहां से भी हो ४० प्रतिशत नेता इकठ्ठा होते हैं तो वे लोग पार्टी विभाजन कर सकते हैं । ऐसी ही नयां व्यवस्था के साथ सरकार ने अध्यादेश लाने की तैयारी की है ।
पूर्व माओवादी नेता हरिबोल गजुरेल ने स्पष्ट शब्द में कहा है कि यह प्रधानमन्त्री ओली रचित पार्टी विभाजन का षडयन्त्र है । उन्होंने कहा है कि देश कोरोना वायरस के कारण संकटग्रस्त अवस्था में है, ऐसी अवस्था में पार्टी विभाजन संबंधी प्रस्ताव लाना नेकपा को विभाजन करने की षडयन्त्र है ।
मन्त्रिपरिषद् में प्रधानमन्त्री ओली की ओर से पार्टी विभाजन संबंधी नयां प्रावधान के साथ अध्यादेश पेश होते ही पूर्व माओवादी निकट मन्त्रिगण पार्टी अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल से मिलने के लिए खुमलटार पहुँचे हैं । सरकार द्वारा प्रस्तावित नयां अध्यादेश को लेकर राजनतीतिक विश्लेषक वृत्त में भी चर्चा होने लगी है कि यह नेकपा विभाजन के लिए ही लाया गया है ।
लेकिन राजनीतिक विश्लेषको में एक समूह ऐसा भी है कि जो कहते हैं– यह विधेयक नेकपा लक्षित नहीं है, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता पार्टी (राजपा) को लक्षित कर लाया गया है । उन लोगों का मानना है कि मधेश केन्द्रीत यह दोनों दल के अन्दर भी तीव्र असंतुष्टियां है, दोनों पार्टी में एक–एक समूह ऐसे है, जो सरकार में शामील होना चाहते हैं ।
नेकपा निकट कुछ नेताओं को मानना है कि समाजवादी और राजापा में रहे असन्तुष्ट समूह को नेकपा में शामील करने के लिए ही पार्टी विभाजन संबंधी नयां विधेयक लाया गया है । सोमबार सम्पन्न मन्त्रिपरिषद् बैठक में प्रधानमन्त्री ओली ने भी बारबार कहा था कि विधेयक नेकपा विभाजन के लिए नहीं है, अन्य किसी के लिए है ।

