Tue. Jul 7th, 2020
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नितु अग्रहरी
रामग्राम, परासी
कोरोना भाइरस (कोभिड–१९) के संक्रमण से विश्व संकट से जूझ रहा है । जब तक कोरोना भाइरस का भ्याक्सिन बन नहीं जाता तब तक किसी का कुछ अनुमान सत्य साबित नही होगा । सम्भावना है लॉकडाउन का समय और भी बढ़े । उसकी वजह से अभी हम लोगों को कोरोना भाइरस से बचना ही प्रथम प्राथमिकता होनी चाहिए ।
इस अवस्था में संक्रमित की संख्या और मानवीय क्षति सीमित रखने के लिए इस विपत्ति की घड़ी में सब लोगों को कोरोना से सामना करने के लिए और लॉकडाउन का पालन करने में साथ देना बहुत जरुरी है । क्योंकि कोरोना से सामना करने का और कोई उपाय नहीं है । नेपाल में तो आधुनिक उपकरण सहित का सुरक्षित अस्पताल भी नहीं है ।
किसी भी महामारी का प्रभाव शारीरिक मात्र नहीं होता । आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और मानसिक भी होता है । मजबूत आत्मबल वालों की रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता भी ज्यादा होती है । इसी लिए बीमार पड़ने के बाद भी ठीक होने की सम्भावना ज्यादा रहती है । मनोचिकित्सक का कहना है कि जिनकी आत्मशक्ति कम होती है उन्हें ठीक होने में कठिनाई होती है । इसका प्रत्यक्ष प्रभाव रोग संक्रमण और नियन्त्रण में भी पड़ता है । कोरोना भाइरस का संक्रमण एक दूसरे से सम्पर्क होने पर ज्यादा फैलता है । इसलिइए इससे बचने का सुरक्षित उपाय दूरी और सजगता अपनाना ही है । नेपाल के सन्दर्भ में सौभाग्य से अब तक अन्य देशों की अपेक्षा कोरोना से संक्रमित लोग कम पाए गए हैं । पर इसका मतलब यह नही है कि नेपाल इस महामारी से सुरक्षित है । कम संक्रमित व्यक्ति पाए जाने की वजह बहुत कम व्यक्तियाें में परीक्षण किया जाना है, समाज में अवहेलित होने के डर से छिपाना या और कोई वजह भी हो सकती है ।
सभी में यह चेतना का प्रसार होना चाहिए कि विदेशों से आए लोगों से सतर्कता अपनाएँ घृणा नहीं करें । ऐसा करने से वो अपनी बात छुपाएँगे और संक्रमण का खतरा बढता जाएगा । साथ ही जो इस समय स्वास्थ्य सेवा से जुडे हैं उनका सम्मान करें । उन्हें घरों से न निकालें क्योंकि वो अपनी जान की बाजी लगा कर हमारी सेवा कर रहे हैं ।

कोरोना संक्रमण ना फैलने पाए इस उद्देश्य से नेपाल तथा अन्य देश लकडाउन में है । सभी शैक्षिक और अन्य संस्थाओं के बन्द होने के कारण लगभग सभी कार्यालयों का काम सम्भव होने तक घर से ही किए जाने के कारण घर के सभी सदस्य घर के भीतर ही हैं । पितृसत्तात्मक हमारे समाज में अघोषित रूप में ही घरेलू काम महिलाओं की जिम्मेदारी होती है । अनौपचारिक बातचीत और सामाजिक संजाल के पोस्ट में भी ये बातें दिखती हैं । अभी सब घर पर रहते हैं जिसके कारण महिलाओें पर घरेलु काम के बोझ बढ़ गए हैं । सभी महिलाओं सबकी फरमाइश पूरी करने में व्यस्त हैं स्वाभाविक है कि थकती भी हैं पर सहयोग की तो बात दूर है सहानुभूति भी नहीं मिलती । पुरुष मोबाइल और लैपटाप में व्यस्त बच्चे खेलने में व्यस्त और महिलाएँ उनकी जरुरतों को पूरी करने में व्यस्त कमोवेश यही हाल सभी घरों का है । उनके पास खुद के लिए समय नहीं है । आज के समय में जो माहोल है उसमें जरुरत तो इस बात की है कि सभी मिलकर एक दूसरे के सहयोग से काम निबटाएँ । ये सोच बदलें कि घर की सफाई से लेकर किचन तक का कम सिर्फ औरतों की जिम्मेदारी है । अगर मिलकर काम करते हैं तो घर का वातावरण भी खुशहाल रहेगा और घरों की औरतों को भी थोडा सुकून मिलेगा । इस समय का सर्वेक्षण बताता है कि घरेलू हिंसा बढ रही है । लोगों के अन्दर धैर्य की कमी हो रही है । बच्चे चिड़चिड़े हो रहे हैं और औरत सबको सम्भालने में थक रही है ।
महिलाओं के लिए बाहर कोभिड–१९ का डर है तो अपने ही घर में जहाँ पर सुरक्षित माना जाता है वहा पर शारीरिक और मानसिक रुप में अपमान, दुव्र्यवहार, हिंसा, हत्या और बलात्कार होने का डर है । बहुत शिक्षित समझदार व्यक्तियाें एवं परिवारों में भी पितृसत्तात्मक मानसिकता ने जकड़ रखा है । सामाजिक सञ्जालो पर महिलाओं, पत्नियों का उपहास उडाता हुआ और अपमानित करने वाले चुटकुले और विडियो को पोस्ट किया जा रहा है । पतियाें को बर्तन माँजते, खाना बनाते, कपडे धोते, सफाई करते दिखाकर, यह जताया जा रहा है कि ये काम महिलाओं का है पुरुषों को शोभा नहीं देता उनका काम यह नही है । हमारी भावी संतति इसी को देख रही है और इसी लैंगिक आधार को अपनाएगी भी । इसलिए आज समय है कि इस सोच में परिवर्तन लाएँ कोई काम लैंगिक आधार पर न बाँट कर उसे समान भाव से करने की सोच बनाया जाना चाहिए ।
आज के साय में कोरोना भाइरस के साथ–साथ भूख की लड़ाई भी जारी है हमें इसमें दिल खोलकर सहयोग करना चाहिए । अशक्त, दैनिक कमाई करनेवाले कामदार, श्रमिक, रिक्सा चालाक आदि लोगों को सामाजिक और आर्थिक सहायता देनी चाहिए । सरकार, गैर सरकारी संस्थाओं को इमानदारी के साथ इस तरफ ध्यान देना चाहिए क्योंकि नेपाल में आधे से अधिक लोगों की आर्थिक स्थिति कमजोर है । कोरोना भाइरस से लड़ने के लिए राज्य और जनता दोनाें की समान जिम्मेवारी है । इस समय में नागरिक को धैर्य और संयम से रहने की जरुरत है । प्रकोप के समय में हरेक नागरिक को कड़े अनुशासन में रहना पडेगा । अपने साथ सबको बचाना ही सबसे उत्तम उपाय है ।
(लेखिका त्रि.वी. मानवशास्त्र संकाय की शोधार्थी हैं । )

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