Wed. Jul 29th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

इन्सानियत धर्म निभाए : ज्योति अग्रवाल

 

अहसास हुआ है मानव को, करी उसने नादानी है।
अब न गंदा होगा कभी, गंगा का पानी है।
खिलवाड करके कुदरत से, भुगत रहा इन्सान है।
रब की बनाई धरती पे, मानव बस मेहमान है।
जाने कितनो को रौंदकर, सीढी चढा है सफलता की।
समझना मुश्किल है किसने, खाल पहनी लोमडी की।
जो हुआ सो हुआ, अब न गल्ती दोहराए हम।
समझ इसको आखरी चेतावनी, इन्सानियत धर्म निभाए हम।

यह भी पढें   कलयुग में सच्चे और सही सोच वाले इंसान को सम्मान क्यों नहीं मिलता? : बिमल सर्राफ
ज्योती अग्रवाल, काठमांडू

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed