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‘एमाले बनाने’ का डर, पुस्तक के प्रति आकर्षण मे कमी ।

 

हेटौडा, माघ २३ – एकीकृत नेकपा माओवादी के नेता तथा कार्यकर्ताओं ने पार्टी अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल के प्रस्ताव से पार्टी को ‘एमाले बनाने’ का डर  पैदा होने का विचार राखा है । एमाओवादी केजारी महाधिवेशन के बन्द सत्र मे बोलते हुये समूह के नेताओं ने पार्टी के नेताओं पर सुविधाभोगी होने का आरोप लगाया है।
अभितक ११ समूह ने आपना अपना धारणा राख चुका है। उनीलोगों मे करोब करिब सभी ने पार्टी सर्वहारा के रोल मोडल जैसा होने के बदले  नेताओं को सुविधाभोगी होने के प्रति अपनी असन्तुष्टी दिखायी है। उनीलोगों ने दाहाल के दस्तावेज से एमाओवादी एमाले पार्टी बनने का डरपैदा होने की बात बतायी है।

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  पुस्तक प्रति आकर्षण मे कमी:
माओवादी के बन्दसत्र स्थल के बाहर अनेक प्रकाशन संस्था पुस्तक लेकर वैठे हैं । लेकिन पुस्तक खरद करने वालों की कमी दिख रही है । पुस्तक पढने और देखने वालों की भी कमी है । क्रान्तिकारी के रुप मे परिचित माओवादी का इस महाधिवेशन मे मार्क्स, लेलिन और माओ की सूचना की बिक्री निराशजनक है।
‘वामपन्थी कार्यकर्ता अब पहले जैसा अध्ययनशील नही दखरहा है, पुस्तक बिक्री कम होने के बाद सिर्जना प्रकाशन प्रालिका के ओम पुन यह प्रतिक्रिया किया। केवल नेताओं की बात सुनने , पत्रपत्रिका पढेकर अपनी धारणा बनाने की प्रवृत्ति बढी हुइ उनका अनुभव है। अगर चर्चित नेता से विमोचित कोइ कृति है तो उसकी खोजी होने की बात उन्होने बतायी।

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