अब भी करना छोड़दो पशुओं पर अत्याचार : कमला भंसाली जैन
“समय-सार”
बने हम अभय-हिंसा के सेनानी,
अपने से अपना कल्याण,प्रेषित हो जिन-वाणी।
स्वयं-स्वयं का करे,अनुसंधान।
दूसरों की नही अपनी दिनचर्या का हो ध्यान।
सोने-उठने में हो संयम,संयम हो खाने-पीने में
संयममय बन जाए तो,आनंद मिलेगा जीने में।
सब चाहतें है रोग मुक्त बनजाए संसार,
रसना पर संयम नही तो ब्यर्थ हो गया है उपचार।
अब भी करना छोड़दो पशुओं पर अत्याचार।
कह रही है प्रकृति हम से-बारम्बार ।
“राम”,”कृष्ण”,”बुद्ध”,”महाबीर” की भूले न “महावाणी”
बने हैम अभय-अहिंसा के सेनानी।

राजविराज।

