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चीन की विस्तारवादी नीति पर अमेरिका ने नए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की बात की

 

अमेरिका ने लद्दाख के साथ ही सीमा पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच हाल के दिनों में बने तनावपूर्ण माहौल पर गंभीर चिंता जताई है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय में दक्षिण व केंद्रीय एशिया प्रभाग की सबसे वरिष्ठ अधिकारी एलिस वेल्स ने चीन के इस चिंताजनक व्यवहार के संदर्भ में कहा है कि इसी वजह से अमेरिका एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय आर्डर की वकालत कर रहा है जिसमें सभी के लिए फायदेमंद हो।

ट्रंप प्रशासन की तरफ से चीन-भारत सीमा विवाद में खुल कर भारत के पक्ष में आने का यह दूसरा मामला है। इसके पहले वर्ष 2017 में जब डोकलाम में दोनो देशों की सेनाएं आमने-सामने आई थी तब भी अमेरिका ने भारत के पक्ष में बयान दिया था। लेकिन इस बार अमेरिकी अधिकारी का बयान ज्यादा सीधा व साफ है। बुधवार को एशिया प्रशांत क्षेत्र पर आयोजित एक वेबिनार में एलिस वेल्स ने भारतीय पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए अमेरिकी रणनीति पर प्रकाश डाला।

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उन्होंने कहा कि चाहे दक्षिण चीन सागर हो या भारत के साथ जुड़ी सीमा, चीन का व्यवहार सिर्फ दिखावा करने तक सीमित नहीं है बल्कि यह भड़काने वाला और चिंताजनक है। यह भी बताता है कि चीन का व्यवहार किस तरह का खतरा पैदा कर सकता है।

मई के पहले हफ्ते में दोनों देशों के सैनिकों की बीच हुई थी झड़प

इस महीने के पहले हफ्ते में लद्दाख और सिक्किम के उत्तरी क्षेत्र में भारत व चीन की सैनिकों के बीच झड़पें हुई हैं। उसके बाद दोनो देशों की तरफ से ना सिर्फ सैनिकों की संख्या बढ़ा दी गई है बल्कि लगातार सीमा पर गश्त भी जारी है। वैसे बुधवार को यह सूचना भी आई है कि दोनो देशों की सेनाओं के बीच विवाद को सुलझाने को लेकर गंभीर चर्चा शुरु हो गई है।
नेपाल और भारत के बीच सीमा विवाद होने में चीन की भूमिका की तरफ भी वेल्स ने इशारा किया और उम्मीद जताई कि नेपाल सरकार अपनी जनता के हितों के लिए खड़ी होगी और एक सार्वभौमिक देश होने के तौर पर वह चीन से कोई आदेश नहीं लेगा।

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वेल्स ने चीन-पाकिस्तान इकोनोमिक कॉरिडोर का भी जिक्र किया और कहा कि यह पाकिस्तान के हित में नहीं होगा। उन्होंने इस परियोजना को एक गैर पारदर्शी, गलत और दूसरे देश को संकट में डालने वाला बताया।

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