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भारत-नेपाल सम्बंध पर दोहे : दीपक गोस्वामी ‘चिराग’

 

बिराटनगर में भानू सम्मान से सम्मानित होने के दौरान प्रस्तुत दोहे

1)
सीता माँ का माइक, चारू की ससुराल।
प्रेम मिला इतना यहांँ, जैसे हो ननिहाल।

2)
संशाधन कम हो भले, लेकिन है खुशहाल।
दुनिया से न्यारा लगा, मुझको तो नेपाल।।

3)
डमरू ले बम-बम करें, इस भू पशुपति नाथ।
लगा नहीं परदेश ये, भोले जी थे साथ।

4)
देखो नभ का चूमती, आठ चोटियां भाल।
एवरेस्ट-जय को चढ़ें, देश-देश के लाल।

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5)
मैची ,कोशी,गण्डकी, नदियों का है जाल।
पात-पात सौंदर्य है, महकी सी हर डाल।

6)
युगों-युगों से बुन रहा, सम्बन्धों का जाल।
रोटी-बेटी से जुड़े, भारत अरु नेपाल।

7)
रम्य सुशोभित यह धरा, हरियाली का थाल।
पावन जल पावन हवा,ऐसा यह नेपाल।

8)
पिण्डेश्वर, मांँ दंतिका, पावन चतरा धाम।
बसती रूह विदेह की, रखा जनकपुर नाम।

9)
वाम दिशा अरि रोकता, है भारत की ढाल।
अविजित और अखण्ड है, यह न्यारा नेपाल।

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10)
‘मोती’* जैसे नूर हैं, भानु भक्त से लाल।
चाहे लघु यह क्षेत्र में, दिल का बहुत विशाल।

दीपक गोस्वामी ‘चिराग’
शिव बाबा सदन, कृष्णाकुंज
बहजोई (सम्भल) 244410 ,उ. प्र. 

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