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मधेश की भूमि नेपाल की, वहां रहनेवाले भारतीय ! यही मानसिकता का उपज है नागरिकता विधेयकः सांसद् यादव

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प्रदीप यादव/फाईल तस्वीर

काठमांडू, २३ जून । प्रतिनिधिसभा सदस्य प्रदीप यादव ने कहा है कि राज्य व्यवस्था समिति द्वारा पारित नागरिकता संबंधी संशोधन विधयेक मधेश की संस्कृति और पहचान के ऊपर प्रहार है, षडयन्त्रपूर्ण नियत से लाया गया इस विधेयक को स्वीकार नहीं किया जाएगा । मंगलबार आयोजित संसद् बैठक में बोलते हुए उन्होंने यह भी कहा है कि विधेयक के कारण नेपाल–भारत बीच युगों युग से कायम संबंध भी खत्तम होनेवाला है ।
सांसद् यादव ने कहा– ‘नेपाल–भारत, विशेषतः नेपाल का मधेश क्षेत्र और भारत का बिहार और यूपी बीच सांस्कृतिक, पारिवारिक, धार्मिक संबंध हैं । यह संबंध दो देशों की कुटनीतिक संबंध से स्थापित नहीं है । नेपाल और भारत निर्माण होने से पहले से ही यह संबंध है, युगों–युग से है । प्रस्तावित नागरिकता विधेयक यही संबंध के ऊपर प्रहार है ।’ उनका मानना है कि शादी कर नेपाल आनेवाले भारतीय बेटियों के ऊपर विभेदकारी नीति है । सांसद् यादव ने प्रश्न किया– ‘भारतीय बेटी नेपाल आकर ऐसी कौन–सी दुर्घटना की है, ताकि उन लोगों के ऊपर आशंका की जा रही है ?’
सांसद् यादव ने यह भी कहा है कि नेपाल मधेश की भूमि को अपना मानता है, लेकिन वहां रहनेवालों को भारतीय । उन्होंने कहा कि यही सोच की उपज ही नागरिकता विधेयक है । सांसद् यादव ने आगे कहा– ‘नेकपा सरकार मधेशी को टार्गेट बनाकर युद्ध कर रहा है, यह हम लोगों की समझ आ रही हैं । हमारी अनुभूति है कि मधेश की जमीन नेपाल की, लेकिन वहां रहनेवाले मधेशी के ऊपर भारतीय की तरह व्यवहार हो रहा है ।’
सांसद् यादव को मानना है कि इसतरह का विभेद जारी रहेगा तो राष्ट्रीय एकता कभी भी संभव होनेवाला नहीं है । उन्होंने आगे कहा– ‘कहा गया है कि भारतीय बेटी लाकर ७ साल के बाद नागरिकता दी जाएगी । लेकिन बिना नागरिकता यहां एक सीमकार्ड भी नहीं खरीद सकते हैं, बैंक खाता भी नहीं खुलती, लोकसेवा परीक्षा के लिए आवेदन भी नहीं दे सकते, ७ साल तक वह बेटी क्या करती ?’ उनका कहना है कि इसतरह का षडयन्त्रपूर्ण विधेयक के विरुद्ध सदन अवरुद्ध हो सकता है और सकड़ में आन्दोलन शुरु हो सकता है ।

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