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भारत में टिड्डी दल के हमले के बाद चीन को लग रहा कि भारत ट्रेड वॉर शुरू नहीं कर पाएगा

 

चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि टिड्डी दल के हमले से यह साफ हो गया है कि भारत चीन के खिलाफ ट्रेड वॉर शुरू नहीं कर पाएगा।  चीन मन्नत माँग रहा कि यह हमला भारत की कमर तोड देगा और वह ट्रेडवार शुरु नहीं कर पाएगा हालांकि, भारतीय विश्लेषकों का कहना है कि वह भारत को पाकिस्तान समझने की भूल कर रहा है।

ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि दूसरे देशों पर पहले हुए टिड्डी हमलों के असर को देखें तो इसका भारत की अर्थव्यवस्था और कृषि पर भारी असर होगा। टिड्डी हमला उम्मीद से अधिक गंभीर है और इसे नियंत्रित के लिए बहुत अधिक प्रयास करने की जरूरत होगी। लेख में यह भी कहा गया है कि टिड्डी के अलावा कोविड-19 से भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर हुआ है। कई रेटिंग एजेंसियों ने भारत की रेटिंग गिरा दी है। हालांकि, कोरोना का जिक्र करते हुए मुखपत्र ने यह नहीं लिखा कि चीन की अपारदर्शिता और समय पर दूसरे देशों को जानकारी नहीं देने की वजह से कोरोना दुनिया में लाखों लोगों की जान ले चुका है।

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लेख में आगे लिखा गया है कि भारत पर टिड्डी हमला जले पर नमक छिड़कने जैसा है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को और बड़ा आघात लगेगा और गरीबी और असमानता बढ़ेगी। बॉयकॉट चाइना को अपने खिलाफ कठोर कार्रवाई के रूप में स्वीकार करते हुए चीन के सरकारी अखबार ने लिखा है कि ऐसी परिस्थिति में भी यदि कुछ भारतीय चीनी सामानों के बहिष्कार के जरिए हमारे खिलाफ कठोर आर्थिक कार्रवाई करने की सोच रहे हैं, तो वे ऐसा नहीं कर पाएंगे।

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दुनियाभर में मारे गए लाखों लोगों के प्रति अब तक अफसोस जाहिर नहीं करने वाले चीन ने कहा कि भारत में गरीबों पर लॉकडाउन के बाद भीषण गर्मी और अब टिड्डियों का हमला  दुखद है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर आक्रामक तेवर पर भारत से उसी की भाषा में मिले जवाब के बाद चीन ने अब कहा है कि कोई सीमा पर अपने पड़ोसी से विवाद नहीं चाहता है।

भारत के अलावा चीन, जापान, ताइवान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे कई देशों से घिर चुका चीन अब दुहाई दे रहा है कि झड़प में उसके भी सैनिक मारे गए हैं, इसलिए अब तनाव ना बढ़ाया जाए। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, ”हम समझते हैं कि कुछ भारतीयों में राष्ट्रीयता की भावना अधिक है, लेकिन यह समझना चाहिए कि सीमा विवाद से दोनों तरफ के सैनिक मारे गए हैं और नुकसान हुआ है। अब यह समय तनाव कम करने का है।

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लेख में कहा गया है कि कुछ चीन विरोधी समूह और नेता चीन के खिलाफ कठोर कार्रवाई से लोगों का ध्यान घरेलू समस्याओं से हटाना चाहते हैं, लेकिन वे इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था में इसकी ताकत नहीं है। उन्हें यह समझना चाहिए कि उनका देश आर्थिक टकराव को लंबे समय तक नहीं चला पाएगा।

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