Tue. Aug 11th, 2020

अनजान की मौत पर : वीरेन्द्र बहादुर सिंह

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-वीरेन्द्र बहादुर सिंह | अमन बालकनी में खड़ा आराम से सिगरेट के कश पर कश लगाते हुए इस तरह धुआं उड़ा रहा था, जैसे इस दुनिया में सिगरेट और उस के अलावा और कुछ भी नहीं है- जबकि उस के पीछे कमरे में पैर पटकते हुए एनी सिगरेट की तरह ही सुलगते हुए कटाक्षों का धुआं उड़ा रही थी- उन का यह हाल एक दिन का नहीं, लगभग रोज का था- अमन की कुछ आदतें एनी को बिलकुल नहीं भाती थीं- उन्हीं आदतों में एक गलती कर के चुप हो जाना था- अमन की इस चुप्पी से एनी का गुस्सा कम होने के बजाए और बढ़ जाता था- फिर तो उस के मुंह में जो भी आता, उसे कहने में वह जरा भी संकोच नहीं करती थी- गुस्से में वह यह भी नहीं सोचती थी कि वह जो  कह रही है, वह उसे कहना भी चाहिए या नहीं- लेकिन जब उस का गुस्सा शांत हो जाता, तब उसे पछतावा भी बहुत होता- लेकिन वह अपने इस गुस्से के आगे मजबूर थी- इस में सारी गलती एनी की ही नहीं थी- अमन काम ही ऐसा कर देता था कि एनी को गुस्सा आ ही जाता था-
एनी अमन पर जितना गुस्सा करती थी, उस से कहीं ज्यादा प्यार भी करती थी- इसीलिए तो एनी गुस्से में अमन को जो कुछ भी कहती थी, वह चुपचाप सुन लेता था- उसे पता था कि गुस्सा शांत होने पर एनी न जाने कितनी बार उस से सॉरी कहेगी- यह भी कहेगी कि अब वह फिर कभी इतना गुस्सा नहीं करेगी- लेकिन अपना यह वादा वह कभी निभा नहीं पाती है- अमन से कोई न कोई गलती हो ही जाती और फिर एनी को अपना वादा भूल जाती और उतना गुस्सा ही गुस्सा कर बैठती
एनी अमन पर बेमतलब गुस्सा नहीं करती थी- एक तो अमन कुछ करताधरता नहीं था, ऊपर से उस का सिगरेट का यह बेमतलब का खर्च- वह भी थोड़ाथाड़ा नहीं, दिनरात में वह कम से कम दो पैकेट सिगरेट फूंक ही देता था- इस के अलावा एनी घर का कोई जरूरी काम उसे सौंप जाती, तो उसे भी ठीक से नहीं करता था- किसी जरूरी सामान के लिए पैसे दे जाती, तो कोई फालतू का सामान खरीद लाता था- ऐसे में भला एनी को ही क्यों, किसी को भी गुस्सा आ जाएगा-
एनी  की इतनी अधिक कमाई नहीं थी कि वह दोबारा पैसे दे कर वह जरूरी सामान मंगा लेती- ऐसे में खीझने के अलावा उस के पास कोई दूसरा उपाय भी नहीं था- उस दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ था- एनी आफिस जाते समय अमन को चार हजार रुपए बिजली का बिल जमा करने के लिए दे गई थी- जबकि अमन बिजली का बिल जमा करने के बजाए एक ऐसा सामान खरीद लाया था, जो उस के किसी काम का नहीं था- बस इसी बात पर एनी भड़क उठी थी-
एनी और अमन, नाम से ही पता चलता है कि दोनों अलगअलग धर्मों से हैं और यह भी निश्चित है कि दोनों ने प्रेेम विवाह किया है- जी हां, दोनों ने प्रेम विवाह ही किया था- एनी के पिता राबर्ट जोसफ का मुंबई में बहुत बड़ा कारोबार था- एनी उन की एकलौती बेटी थी- जबकि अमन के पिता सरकारी नौकरी में उच्च अधिकारी थे- अमन का एक बड़ा भाई भी था, वह भी सरकारी नौकरी में लग गया था- उस की नौकरी लग गई, तो घर वालों ने उस की शादी भी कर दी थी-
अमन एक रईश बाप का बेटा था- जो उस के हावभाव और चेहरेमोहरे से साफ झलकता था- पढाईलिखाई में भी वह अव्वल था- ऐसे में कोई भी लड़की उस की ओर आकर्षित हो सकती थी- इस का मतलब साफ था कि एनी ने उस से प्यार कर के केाई गलती नहीं की थी- अमन और एनी में प्यार हुआ, तो बात विवाह तक जा पहुंची- लेकिन विवाह के लिए न तो अमन के घरवाले राजी थे, न एनी के घर वाले- जबकि अमन और एनी साथसाथ जीने और मरने का निर्णय कर चुके थे- उन का सोचना था कि शादी कर लेने के बाद घर वाले कुछ दिनों तक नाराज रहेंगे, उस के बाद सब ठीक हो जाएगा और घर वाले उन्हें अपना लेंगे-
यही सोच कर घर वालों के लाख मना करने के बावजूद अमन और एनी ने शादी कर ली थी- परिणामस्वरूप दोनों को ही घर से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था- कुछ दिनों बाद एनी के पापा ने इस रिश्ते को यह कहते हुए मंजूरी दे दी थी कि अपने जीते जी वह उन्हें अपने घर में न रहने देंगे न अपनी संपति से एक कौड़ी देंगे- उन के न रहने पर तो उन्हीं का सब कुछ है- लेकिन उन के जीवित रहते तक उन्हे खुद ही कमानाखाना होगा- उन के हिसाब से यही एनी की गलती की सजा थी-
एनी के पिता की ओर से तो इस रिश्ते को मान्यता मिल गई थी, लेकिन अमन के पिता को तो बेटे की इस शादी के बार में कुछ कहनेसुनने का मौका ही नहीं मिला था- इधर अमन ने एनी से प्रेम विवाह किया, उधर उस के पापा रिश्वत लेने के मामले में फंस गए- कहते हैं, वह बहुत ईमानदार अफसर थे, कुछ लोगों ने साजिश रच कर उन्हें फंसाया था- शायद इसीलिए इस आरोप को वह बर्दाश्त नहीं कर पाए और जेल से आने के बाद पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली थी- इस तरह उन के मरने के बाद इस रिश्वत कांड की सच्चाई भी दफन हो गई थी-
पिता होते, तो अमन को कुछ न कुछ राहत जरूर मिलती- लेकिन पिता की मृत्यु होते ही अमन को घर से बाहर करने का उस के भइयाभाभी को जैसे बहाना मिल गया था- उन्होंने रिश्तेदारों से पिता की आत्महत्या करने की वजह अमन द्वारा दूसरे धर्म की लड़की से शादी की बात कह कर पिता के शव को हाथ तक नहीं लगाने दिया था- उस समय मां की कुछ चल नहीं पाई थी- पिता की मृत्यु और भाईभाभी के इस व्यवहार से अमन इस तरह टूट गया कि वह किसी काम का नहीं रह गया- गुमशुम बैठा दिन भर सिगरेट फूंकता रहता- ऐसे में एनी ने एक अच्छी प्रेमिका और पत्नी बन कर उसे पूरा सहयोग दिया-
पिता की मृत्यु और घर वालों के व्यवहार से अमन की जो स्थिति हुई थी, आज के भौतिक युग में शायद ही कोई लड़की उसका साथ निभाती- लेकिन एनी ने तो उस के लिए अपने सुखवैभव को ही नहीं, मातापिता तक को छोड़ा था- इस हालत में वह अमन को कैसे छोड़ सकती थी- एनी पढ़ीलिखी तो थी ही, एक अच्छे कारोबारी बाप की बेटी भी थी- इसलिए थोड़े ही प्रयास में उसे उस की योग्यता के अनुसार अच्छी नौकरी मिल गई थी- इस नौकरी से उसे पिता के घर वाला सुखवैभव तो नहीं मिल सका था- लेकिन इतना कुछ जरूर मिल रहा था कि उस का और अमन का गुजरबसर आराम से हो सके-
अपने प्यार के बल पर ही एनी ने अमन को संभाल लिया था- उसने अपने प्यार और स्नेह से ही अमन के मन में बैठी कुंठा को बाहर निकाल फेंका था- ठीक होने पर अमन भी कामधाम की तलाश में लग गया, जिस से दोनों कमा कर ढंग की जिंदगी गुजार सकें- लेकिन तमाम प्रयास के बावजूद भी अमन को कोई ढंग की नौकरी नहीं मिल सकी थी- छोटीमोटी नौकरी वह कर भी नहीं सकता था-
इस बीच अमन की भागदौड़ से लेकर, उस के खाने पहनने और सिगरेट तक का खर्च एनी ही उठाती रही- इस सब में एनी को थोड़ी दिक्कत तो होती थी, लेकिन अमन के लिए यह सब करने में उसे केाई परेशानी नहीं हो रही थी- उस के लिए यह सब करने में उसे खुशी होती थी- एनी सुबह जल्दीजल्दी सारे कामकाज निपटा कर घर से निकलती, तो लौटने में उसे सात, साढ़े सात बज जाते थे- ऐसे में घर के जरूरी सामानों की खरीदारी से। ले कर दिन मे ंकिए जाने वाले सभी जरूरी काम अमन करता था- बैंक में पैसे जमा करने हैं या निकालने हैं, कोई बिल जमा करना है, गैस बुक करती है, इस तरह के अमन ही करता था- उस रोज एनी आफिस जाने लगी, तो 4 हजार रुपए देते हुए अमन से कहा था कि वह बिजली का बिल आज ही जमा कर देगा-
बिजली का बिल जमा करने के लिए अमन समय पर घर से निकला- बिजली के दफ्रतर जाने वाले रास्ते में एंटीक सामानों की एक दुकान पड़ती थी- अमन अकसर उस रास्ते से आताजाता था, लेकिन उस ने कभी उस दुकान की ओर देखा तक नहीं था- देख कर करता भी क्या, जिस के पास अपना खर्च चलाने के लिए पैसे न हों, वह ऐसी दुकान की ओर देख कर करेंगा भी क्या? लेकिन उस दिन उस के मन में न जाने क्या आया कि वह बिना कुछ सोचेविचारे उस दुकान में घुस गया- दुकान के बीच रखी एक मेज पर एक पुराने जमाने का डिजाइनर बाक्स रखा था- उसे देख कर यही लगता था कि वह किसी राजामहाराजा या नवाब का रहा होगा- अमन की नजर उसी बाक्स पर जम गई- उस बाक्स में ऐसा न जाने कौन सा आकर्षण था कि अमन की नजर उस पर से हट ही नहीं रही थी- न चाहते हुए भी अमन ने दुकानदार से उस की कीमत पूछ ली-
अमन के हावभाव और स्थिति को देख कर दुकानदार को यही लगा कि यह आदमी इस बाक्स को खरीदने वाला नहीं है- सिर्फ उसका समय बर्बाद करने और अपना समय पास करने आया है- फिर भी उस ने बाक्स पर एक नजर डालकर लापरवाही से कहा, ‘‘इसे खरीदना तुम्हारे वश की बात नहीं है- यह पूरे चार हजार रुपए का है-’’
उस समय अमन को न जाने क्या सूझा कि अमन ने बिना कोई मोलभाव किए जेब में हाथ डाल कर बिजली का बिल जमा करने वाले चार हजार निकाल कर दुकानदार को थमा दिए- दुकानदार हैरान रह गया- लेकिन उसे तो अपना सामान बेचने से। मतलब था- जल्दी न बिकने वाले सामान के अच्छे खासे पैसे मिल रहे थे- उस ने झट से रुपए गल्ले में डाले और बाक्स को रद्दी अखबार में बांध कर अमन को थमा दिया-
अक्सर कोई भी अनचाहा काम करने के बाद पछतावा तो होता ही है- लेकिन वह बाक्स खरीदने के बाद अमन को न जाने क्यों कोई पछतावा नहीं हुआ था- बल्कि उस बाक्स को खरीद कर उसे गर्व सा महसूस हो रहा था- वह बाक्स लाकर उस ने सेंट्रल टेबल पर रख दिया और खापी कर आराम से सो गया-
दोपहर बाद यही कोई चार बजे के आसपास डोरबेल बजी, तो अमन की आंख खुली- उसकी समझ में नहीं आया कि इस समय कौन आ गया- क्योंकि एनी तो सात बजे के बाद आती थी- उस के यहां अन्य कोई आताजाता नहीं था- बेमन से उठकर उस ने दरवाजा खोला, तो बाहर एनी को खड़ी देख कर उसे हैरानी हुई- अंदर आते हुए एनी ने कहा, ‘‘सिर में दर्द हो रहा था, इसलिए आज जल्दी चली आई-’’
जल्दीजल्दी कपड़े बदल कर एनी ने गैस पर चाय का पानी चढ़ाया और एक गिलास ठंडा पानी ले कर सोफे पर बैठते हुए बोली, ‘‘बिजली का बिल जमा कर आए?’’
‘‘नहीं, बिजली का बिल नहीं जमा किया-’’ किचन की ओर जाते हुए लापरवाही से अमन ने कहा-
‘‘क्यों?’’ झटके से सीधी होती हुई एनी ने पूछा-
‘‘बिल के पैसे कहीं और खर्च हो गए-’’ चाय छानने के लिए कप रखते हुए अमन ने कहा-
‘‘तुम्हें पता था कि बिजली का बिल जमा करने की आज अंतिम तारीख थी- फिर भी तुमने बिजली का बिल जमा करने के बजाए पैसे कहीं और खर्च कर दिए- अब तो मेरे पास रुपए भी नहीं हैं कि बिजली का बिल जमा करा दूं- तुमने रुपए कहां खर्च किए, जरा मैं भी तो जानूं?’’ एनी खीझ कर बोली-
अमन चाय के कप रख कर एनी के सामने ही बैठ गया था- सामने सेंट्रल टेबल पर अखबार में लिपटा वह बाक्स रखा था, जिसे बिल जमा करने वाले पैसे से वह खरीद कर लाया था- लेकिन तनाव की वजह से एनी का ध्यान  उस पर नहीं गया था- उस का ध्यान तो उस पर तब गया, जब अमन ने अखबार में लिपटे उस बाक्स को उस की ओर इस तरह बढ़ाया, जैसे उस के लिए कोई बहुत कीमती उपहार खरीद लाया हो- एनी ने एक नजर उस पर डाली, फिर आंखों से इशारा करते हुए पूछा, ‘‘यह क्या है?’’
‘‘यह एक एंटीक बाक्स है- इसे देखा, तो न जाने क्यों यह मुझे पसंद आ गया- फिर मैं ने इसे खरीद लिया-’’ अमन नजरें चुराते हुए बोला- शायद अब उस में एनी से नजरें मिलाने का साहस नहीं रह गया था-
एनी ने बाक्स के ऊपर लिपटा अखबार हटाते हुए पूछा, ‘‘कितने रुपए का है यह?’’
‘‘पूरे चार हजार रुपए का—’’
अमन अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया था कि एनी चीखी, ‘‘क्या, चार हजार रुपए का–? तुम्हारा दिमाग खराब हो गया था क्या, जो यह सड़ा सा डिब्बा चार हजार रुपए में खरीद लाए- यह हमारे काम जिस काम का है, जिस के लिए तुम ने बिजली का बिल जमा करने वाले रुपए इस में खर्च कर दिए- अब तो बिजली का बिल अगले महीने ही जमा हो पाएगा- तुम्हारे लिए पैसे की कोई कीमत नहीं है- बैठेबैठे खाते हो, ऊपर से दिन भर सिगरेट फूंकते रहते हो—’’
फिर तो एनी के मुंह में जो भी आया, वह कहती रही- अमन थोड़ी देर तक तो वहां खड़ा रहा, फिर सिगरेट सुलगा कर बालकनी में जा कर खड़ हो गया और लापरवाही से सिगरेट फूंकता रहा- एनी गुस्से में तो थी ही, उसे वह बाक्स बेकार की चीज लगा, इसलिए उस का मन हुआ कि वह उसे उठा कर बाहर फेंक दे- उस ने बाक्स को फेंकने के लिए जैसे ही उठाया, उस का ढक्कन खुल गया- एनी उसे फेंकती, तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया,  दरवाजा खटखटाने की आवाज एनी के कानों में पड़ी, तो उसने हाथ में थामा बाक्स मेज पर रख दिया- एनी पैर पटकते हुए दरवाजे पर पहुंची और झटके से दरवाजा खोल कर देखा, तो बाहर कोई नहीं था- उसने इधरउधर झांका- बाहर कोई नहीं दिखाई दिया, तो वह वापस आ गई-
एक तो एनी वैसे ही गुस्से में थी- दरवाजे के बाहर उसे कोई नहीं दिखाई दिया, तो वह खींझ उठी- एक बार तो उसे लगा कि शायद उसे भ्रम हुआ है, लेकिन दरवाजा खटखटाने की आवाज उस ने साफसाफ सुनी थी- उसने अपनी यह खीझ भी अमन पर ही उतारी- एनी ने बाक्स फेंकने के लिए उठाया था, तो उस का ढक्कन खुल गया था- उस समय उस की नजर बाक्स के अंदर के हिस्से पर चली गई थी- अंदर से वह बाक्स उसे बहुत अच्छा लगा था- इसलिए उसका मन बाक्स खोलकर देखने को हो रहा था-
एनी ने जैसे ही बाक्स का ढक्कन खोला, वैसे ही दरवाजा खटखटाने की आवाज आई- वह बाक्स के अंदर देख भी नहीं पाई थी कि उसे ढक्कन बंद कर के दरवाजा खोलना पड़ा- इस बार भी उसे दरवाजे के बाहर कोई नहीं दिखाई दिया- एनी की समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है- इस बार वह दरवाजा खुला छोड़ कर ही बाक्स के पास आ गई और ढक्कन खोला- तभी उसके कानों में दरवाजे की खटखट की आवाज पड़ी- एनी ने दरवाजे की ओर देखा- सूटबूट पहने एक आदमी दरवाजा खटखटा रहा था- एनी ने उसे घूरते हुए पूछा, ‘‘कहिए, किससे मिलना है-’’
‘‘आपने मुझे बुलाया है, इसलिए मैं आप से ही मिलने आया हूं-’’
‘‘मैंने आपको बुलाया है?’’ एनी चौंकी, ‘‘मैं तो आपको जानतीपहचानती भी नहीं, आज पहली बार देख रही हूं, फिर मैं ने आपको कब बुला लिया?’’
‘‘मैडम मैं आप से मिलता कैसे, क्योंकि मैं तो इस बाक्स में बंद था-’’
‘‘इस बाक्स में बंद थे?’’ एनी आश्चर्य से बोली, ‘‘लेकिन आप तो बाहर से आ रहे हैं?’’
‘‘यह कोई बात नहीं है मैडम, आपने अलादीन के चिराग वाला किस्सा तो पढ़ा ही होगा- मेरा भी कुछ वैसा ही किस्सा है- मेरा नाम मेवरिक है- जैसे ही कोई इस बाक्स का ढक्कन खोलेगा, उसी समय मुझे उस के पास पहुंचना होगा- ढक्कन बंद होते ही मैं गायब हो जाऊंगा- अब आप कहें, तो मैं अंदर आ जाऊं? जब आप ने मुझे बुलाया है, तो मुझे आपकी इच्छा पूरी करनी ही होगी- आप जो भी चाहेंगी, वह सब मुझे देना होगा-’’
‘‘ठीक है, आप अंदर आ जाइए मेवरिकजी-’’ एनी ने उसे हैरान नजरों से देखते हुए कहा, ‘‘लेकिन भीतर आकर दरवाजा बंद कर लीजिएगा-’’
बालकनी में खड़े होकर सिगरेट फूंक रहे अमन ने एनी को किसी से बातें करते सुना, तो सिगरेट फेंक कर वह भी कमरे में आ गया- उसी बीच एनी ने बाक्स का ढक्कन बंद करने के लिए हाथ बढ़ाया, तो मेवरिक हड़बड़ा कर बोला, ‘‘यह आप क्या कर रही हैं, आप के ढक्कन बंद करते ही मैं गायब हो जाऊंगा- जबकि मुझे अभी आपकी इच्छा पूरी करनी है- एक बार में आप जो भी चाहे, मांग लें- मैं वह सब चीजें लाकर आपको दूंगा- लेकिन मेरी एक शर्त होगी-’’
‘‘क्या कहा, मैं जो भी मांगूगा, वह सब आप ला कर देंगे?’’ अमन और एनी एक साथ आश्चर्य से बोले-
‘‘क्यों नहीं दूंगा- मैं आया ही इसीलिए हूं- आप जो भी मांगेंगे, मैं वह सब ला कर आप को दूंगा, लेकिन मेरी एक शर्त है-’’ मेवरिक ने कहा-
अमन और एनी ने एकदूसरे को देखा, फिर एक साथ बोल पड़े, ‘‘आप की शर्त क्या है?’’
‘‘मैं आपकी इच्छा पूरी करूंगा, तो उसके बाद एक ऐसे आदमी की मृत्यु हो जाएगी, जिसे आप बिलकुल नहीं जानते होंगे-’’ मेवरिक गंभीर होकर बोला-
‘‘मरने वाला आदमी मेरे लिए एकदम अनजान होगा?’’ अमन ने पूछा-
‘‘जी, बिलकुल अनजान होगा- आपने उसे कभी देखने की कौन कहे, उसके बारे में सुना भी नहीं होगा-’’
‘‘फिर भी वह किसी का भाईबाप या पति तो होगा ही- हो सकता है, वह बालबच्चों वाला भी हो- नहीं, मैं अपनी इच्छा पूरी करने के लिए किसी की जान नहीं लेना चाहती- अपने सुख के लिए किसी परिवार को अनाथ  नहीं कराना चाहती-’’ एनी ने कहा-
‘‘आप कहां किसी की जान ले रही हैं, जान तो मैं लूंगा, वह भी ऐसे आदमी की, जिसे आप लोग बिलकुल नहीं जानते- कौन मरा, आपको कहां पता चलने वाला है- ऐसा कीजिए, आप दोनों बालकनी में जा कर मेरे प्रस्ताव पर खूब विचार कीजिए, सलाह कीजिए- उस के बाद आप को लगता है कि मेरा प्रस्ताव ठीक है, तो आपको जोजो चाहिए, एक लिस्ट बना कर दे दीजिए, फिर वे सारी चीजें ला कर मैं आपको दे दूंगा और फिर अपना यह बाक्स ले कर चला जाऊंगा-’’ मेवरिक ने पूरी बात कह दी-
एनी और अमन बालकनी में चले गए, तो मेवरिक वहां रखे सोफे पर पैर फैला कर आराम से बैठ गया- थोड़ी देर तक दोनों बालकनी में खामोश खड़े रहे- इस खामोश को एनी ने भंग करते हुए, ‘‘मुझे तो मेवरिक का यह प्रस्ताव ठीक नहीं लग रहा है- अपनी इच्छा पूरी करने के लिए मैं किसी की जान लेना उचित नहीं समझती- आखिर जो मरेगा, भले ही हम उसे नहीं जानते, लेकिन उसका भी तो घरपरिवार और बालबच्चे होंगे-’’
‘‘लेकिन हमारी इच्छा पूरी होने पर, जो आदमी मरेगा, हम उसे कहां जनते हैं- वह तो हमारे लिए बिलकुल अनजान होगा-’’ अमन ने कहा-
‘‘वह भले ही हमारे लिए अनजान होगा, लेकिन उस की मृत्यु तो हमारी वजह से होगी-’’ एनी ने कहा-
‘‘इस दुनिया में न जाने कितने लोग रोज मरते है- उन्हीं के साथ एक और मर जाएगा, तो कहां दुनिया खत्म हुई जा रही है- सोचो, हम कितनी अभावों भरी जिंदगी जी रहे हैं- मेवरिक हमें वह सब देने को तैयार है, जो हम चाहेंगे- हमारी इच्छा पूरी होने पर अगर कोई मरता है, तो मरें हमें उस से क्या लेनादेना है- हमें अपना देखना है- हमें वह सब सुखसुविधा मिल जाएगी, जिस से हम वंचित हैं- किसी और की चिंता छोड़कर, अपने बारे में सोचो-’’ अमन ने एनी को समझाया-
अमन की बातें सुन कर एनी सोच में। डूब गई थी- काफी देर तक सोचनेविचारने के बाद एनी ने कहा,। ‘‘तुम ठीक ही कहते हो- आखिर एक अजनबी के मरने से हम सुखचैन की जिंदगी जी सकते हैं, तो इस में बुराई। क्या है-’’
फिर एनी और अमन कागज और कलम ले कर उन चीजों की लिस्ट बनाने लगे, जो उन्हें चाहिए थी- लिस्ट तैयार कर के जब उन्होंने उसे मेवरिक को थमाई, तो वह मुसकराते हुए बोला, ‘‘ये सारी चीजें, रुपए पैसे, गहने, सब कुछ आपको मिल जाएंगे- उस के बाद मैं अपना यह बाक्स लेकर मैं चला जाऊंगा-’’
‘‘आप इस बाक्स को ले जा कर क्या करेंगे? अमन ने पूछा-
‘‘आप की ही तरह किसी अन्य जरूरतमंद को दूंगा, जो आप लोग को नहीं जानता होगा, जिस के लिए आप लोग अनजान होंगे-’’ मेवरिक ने मुसकराते हुए कहा
वीरेंद्र बहादुर सिंह
जेड 436ए, सेक्टर 12ए नोएडा,गौतम बु( नगर, पिन: 201301[email protected]

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