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रेडियो का गिरता स्तर का कारण : अंशुल की जुबानी

 

मेरठ , भारत |आज के डिजिटल युग में रेडियो ने वैसे तो तमाम तरक्की की है मग़र रोज़गार के मामलों में पीछे पर रहा है | उसका एक कारण है वैसे हर राज्य के तमाम शहरों में सामुदायिक रेडियो भी लांच किए जा रहे हैं एक रेडियो हमारे शहर बिजनौर उत्तरप्रदेश में भी लांच किया गया है | मैं भी एक युवा हूँ और पत्रकारिता भी मेरी पूर्ण हो चुकी है साथ में रेडियो का छः माह का डिप्लोमा कार्स भी कर रखा है हमारे सपने भी बहुत ऊँचे थे साहब मग़र एक प्रयास और हमने करके देखा | कुछ रेडियो वालों ने बुलाया भी पर वहाँ से नकारात्मक जवाब सुनने को मिला |

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एक सवाल यह उठता है कि क्या रडियो चलाने वाले इंटर्नशिप क्यों नही देता ? और वह अपना शर्त पहले क्यों नहीं बताते ? अचानक किसीको क्यों रिजेक्ट करतें है ? रेडियो का तो कर्तव्य बनता है कि अच्छे से सीखा कर आप रेडियो में मौका देते कार्य करने का मग़र  ऐसा नही किया जाता | क्योंकि यहाँ पर भाईभतीजा वाद कायम है जिसके कारण टेलेंटेड युवा दर-दर ठोकरे खा रहे हैं आज पत्रकारिता क्षेत्र के विद्यार्थियों की रुचि भी रेडियो की तरफ़ से हटती जा रही इसी कारण की वज़ह से ऐसे ऐसे लोग रेडियो में बैठे जिनको घर पर बैठे होना चाहिए था और टेलेंटेड युवा आज भटकने को मजबूर है |
आख़िर क्यों नही लगती नौकरी एक सवाल एक सबसे बड़ा कारण हमारे पास रेफरेन्स नही होता न किसी का इसलिए नही लगती साहब मेरा एक सवाल क्या टैलेंटेड युवा को भी रेफरेन्स दिखाना पड़ेगा जब उनको जॉइनिंग मिलेगी कितना हद तक इंसानियत गिर गई है एक युवा की उम्मीद टूट जाती है फ़िर इन्ही लोगो की वजह से वो तनाव में और नकारात्मक बन जाता है जागो युवाओं अपनी आवाज़ को बुलंद करो हिमालिनी के संग अगर आज नही जागे तो फ़िर कभी नही जाग पाओगे अपनी मंजिल को सिर्फ ढूंढते ही रह जाओगे बाज़ी कोई और मार जाएगा आओ मिलकर शपथ ले भाईभतीजा वाद का खात्मा करें।

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