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प्रदेश २ में जासूसी के नाम पर लाखों रुपैया खर्च

 

२६ जुलाई, जनकपुर । प्रदेश नम्बर २ की सरकार का कहना है कि पुलिस प्रशासन हमारे अधिन नहीं है, यही कथन के साथ प्रदेश में शान्ति सुरक्षा बनाए रखने के बहाने ‘जासूसी’ के नाम पर लाखों रुपैया खर्च किया गया है । आन्तरिक मामिला मन्त्री ज्ञानेन्द्र यादव ने बताया कि प्रदेश प्रहरी प्रदेश सरकार के अधिन नहीं होने से शान्ति सुरक्षा स्थापना करने में समस्या हो रही है ।
महालेखा परीक्षक कार्यालय के प्रतिवेदन में उल्लेख है कि इस बीच मन्त्री और सचिव ने जासूसी के नाम पर लगभग २४ लाख रुपैया खर्च किया है । महालेखा परीक्षक के कार्यालय द्वारा सार्वजनिक आर्थिक वर्ष ०७५(०७६ के प्रतिवेदन में सुराकी के नाम पर बहुत बडी रकम खर्च किया गया है ।
मुख्यमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद् की कार्यालय द्वारा ०७५ जेठ १० गते के निर्णयानुसार आन्तरिक मामिला तथा कानून मन्त्रालय का मन्त्री और सचिव को आकास्मिक समस्या में शान्ति सुरक्षा के काम बिल पेश करना आवश्यक नहीं है । महीन में अधिक से अधिक पांच बार होने वाला प्रति रकम ३० हजार रुपैया और सचिव को १० हजार तक खर्च करने की अख्तियारी दी गई है । उसी दौरान नगत वर्ष मन्त्री १८ लाख और सचिव ६ लाख रुपैया कूल २४ लाख रुपैया खर्च करने का विवरण प्रतिवेदन में उल्लेख है ।

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