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मौत बाँटने वाला डाक्टर, जिसने सौ हत्या करने के बाद गिनती करनी छोड दी

 

 

भारत दिल्ली के डॉ. देवेन्द्र शर्मा को मौत बांटने का शौक सा बन गया था। वह करीब-करीब हर दस दिन में एक टैक्सी चालक की हत्या करता था। वह टैक्सी चालक की तड़पा-तड़पाकर हत्या करता था। इसने जो 100 से ज्यादा टैक्सी चालकों की हत्या की है वह एक ही तरीके से की है। हालांकि गुरुग्राम पुलिस के रिकार्ड में सिर्फ 20 हत्या का जिक्र है। कोर्ट ने उसे करीब 80 हत्याओं में बरी कर दिया था। पुलिस के पास इन हत्याओं का कोई सबूत नहीं था। आरोपी इतना चालाक था कि वह किसी हत्या का कोई सबूत नहीं छोड़ता था। परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर उसे एक ही हत्या में उम्रकैद की सजा हुई है।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के अधिकारियों के अनुसार आरोपी गुरुग्राम, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, अलवर, जयपुर, रेवाडी, गुरुग्राम, बल्लभगढ़ व फरीदाबाद के टैक्सी चालकों को ही अपना शिकार बनाता था। ये अलीगढ़ के लिए टैक्सी बुक करता था। एमरजेंसी होने की बात कहकर टैक्सी चालक को ज्यादा पैसे देने की बात कहता था। रास्ते में ये टैक्सी चालक से दोस्ती गांठ लेता था। अलीगढ़ से पहले ये टैक्सी को रुकवाता और पीछे से रस्सी से चालक का गला दबाकर हत्या कर देता था। इसके बाद ये चालक के शव को हजारा नहर में फेंक देता था।

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अपराध शाखा के अधिकारियों को संदेह है कि ये टैक्सी चालक की हत्या कर उनकी किडनी निकाल लेता था।  पुलिस को किसी टैक्सी चालक का अभी तक शव नहीं मिला है जिससे ये पता लग सके। ये कत्ल करने में माहिर हो चुका था और कुछ ही सेकेंड में चालक की हत्या कर देता था। गुरुग्राम व आसपास से जब टैक्सी चालक गायब होने लगे तो हरियाणा पुलिस परेशान हो गई थी। गुरुग्राम पुलिस ने टैक्सी स्टेंडों पर सादा वर्दी में पुलिसकर्मी तैनात किए और टैक्सी बुक करते हुए आरोपी को नौ फरवरी, 2004 को इसे गिरफ्तार कर लिया।

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आरोपी ने पुलिसकर्मियों को ये बताया कि उसने 100 से ज्यादा हत्या की हैं तो पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए थे। पुलिस कुछ ही हत्या होने की बात मानकर चल रही थी। परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर उसे टैक्सी चालक नरेश वर्मा की हत्या के केस में 14 मई, 2008 में उम्रकैद की सजा हुई थी। ये हत्या इसे सोहना-गुरुग्राम रोड पर की थी।

कई राज्यों की पुलिस ने उससे पूछताछ की, मगर अभी तक ये पता नहीं लग पाया कि डॉक्टर देवेन्द्र शर्मा ने इनती हत्याएं क्यों की। पुलिस उसे मानसिक रूप से बीमार होने की बात कहती रही। चाहे भौंडसी जेल हो य जयपुर जेल हर जेल में उसका कैदियों में खौफ बना हुआ है।

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