जन्म दिन मोहन का : जय प्रकाश अग्रवाल
*जन्म दिन मोहन का*
कैसी मस्ती छायी, सबके तन में- मन में,
जन्म दिन मोहन का ।
सखीरी ! कान्हा का जन्मोत्सव ।
ये ब्रज रज कण करते कलरव ।
नाचे रिम झिम भादौ पागल,
प्रसव नहीं सखि, है हुआ प्रभव ।
बौराये पशु-पंछी, खोये अपनेपन में,
जन्म दिन मोहन का ।
बलैंया लें यशोदा मैया,
मंत्र मुग्ध गोकुल की गैया ।
इतराती – इठलाती यमुना,
हरे भरे सब ताल – तलैया ।
चपला करती नृत्य, छुप छुप काले घन में ।
जन्म दिन मोहन का ।
ये कुंज गली, सारे पनघट,
डाबर-सर या फिर वंशीवट ।
रास रंग में डूबेंगे सब,
ऊधम करेंगे नटवर नटखट ।
गूँजेंगे पदगान नित, सखिरी वृन्दावन में,
जन्म दिन मोहन का ।
हो जायें आज सब श्याममय ।
ले लें सखि मिल श्यामाश्रय ।
हम रटें – जपें बस एक मंत्र,
है हृदय तुम्हारा, नन्द तनय !
मद मत्त गोपियाँ, कान्हा के सम्मोहन में ।
जन्म दिन मोहन का ।

काठमांडू, नेपाल ।
जय प्रकाश अग्रवाल (चैनवाा
काठमांां


