कोरोना से जीत अगर हासिल कर भी ले आने वाली बड़ी आफ़त से कैसे बच पाये ! : किशोरी शारदा
कोरोना संकट
(ग़रीब बच्चों का भविष्य??)
इस व्यथा का कैसे वर्णन करूँ मैं
कैसे संकट के बादल हैं छाए
जितना सुलझाने की कोशिश करती हूँ
ये गुत्थी उतनी ही उलझती जाए
वर्तमान ,भूत ,भविष्य तीनों संकट में
कोरोना की विपदा को कैसे निपटाए
पराजित मानव पस्त हो चुका है अब
वो उपरवाला ही कोई सन्मार्ग दिखाए
ग़रीबी से बच्चे पढ़ ना पाऐं ऑनलाइन
क्योंकि मिलते नहीं हैं उनको मोबाइल
पढ़ाई से उस मासूम का ध्यान हट जाये
जब ख़ाली पेट बच्चे का मन भटकाए
आधा-पेट जिस बच्चे को खाना ना मिले
वह बच्चा ऑनलाइन पढ़ाई कैसे करे
माँ-बाप की नौकरी-मज़दूरी हो छीनी
दो वक्त की रोटी उस घर में कैसे आए
घर की परिस्थिति देख विह्वल हो जाए
बच्चा काम करे, पुनः कमाने लग जाए
सड़कों के कचरे साफ करे,गाडियाँ पोंछे
दो पैसे लाकर घर का,बुझा चूल्हा जलाए
अनेकों प्रयत्न कर हमने बालश्रम हटाया
बच्चे ही हैं भविष्य हमारे,येअवगत कराया
राष्ट्रसमृद्धि में पढ़ाई का महत्व समझाकर
पाठशाला की ओर उनका कदम बढ़ाया
विचित्र इस ज़िंदगी का चक्र वापस घूमे
बच्चों को फिर से उसी मोड़ में ले आये
पढ़ाई छूटी,अब वही बच्चे झाड़ू लगाए,
माँ-बाप भी अपने सँग मज़दूरी कराये
जब इस लॉकडाउन से बाहर निकलेंगे ,
अनिश्चित भविष्य पर कितने ज़ख़्म होंगे
सोच कर भी डर लगता है मन सिहरता है
जब भी मुसीबत के ये वक्त ख़त्म होंगे
बच्चों के भविष्य का क्या होगा पता नहीं
शायद ही कोई विज्ञ अभी कुछ कह पाये
कोरोना से जीत अगर हासिल कर भी ले
आने वाली बड़ी आफ़त से कैसे बच पाये
कैसे बच पाये !
कैसे बच पाये!!

धन्यवाा

