Tue. Oct 27th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

आज गणेश चतुर्थी, गणपति को एकदंत क्यों कहा जाता है ?

 

भादो माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, भादो के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को बप्पा का जन्म हुआ था। इसे विघ्नहर्ता के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं। इस साल गणेश चतुर्थी 22 अगस्त 2020 को पड़ रही है।

भगवान गणेश को गजानन, बप्पा, विघ्नहर्ता या एकदंत भी कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर श्रीगणेश एकदंत क्यों कहलाए। जानिए इस रोचक कथा के बारे में।

यह भी पढें   नेपाल में जेन-जी आंदोलन को लोकतांत्रिक तरीके से संभाला गया: स्वर्णिम वाग्ले

गजानन की कथा-

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती स्नान के लिए चली गईं और उन्होंने द्वार पर गणेश जी को बैठा दिया। माता पार्वती ने गणेश जी से कहा था कि जब तक उनकी इजाजत न हो, वह किसी को अंदर न आने दें। तभी वहां पर भगवान शिव का आगमन हुआ। भगवान शिव ने प्रवेश की कोशिश की तो गणेश जी ने उन्हें रोक दिया। इस बात से क्रोधित होकर भगवान शिव ने गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया। जब माता पार्वती बाहर निकलीं तो यह देखकर व्याकुल हो उठीं और उन्होंने भगवान शिव से गणेश जी को बचाने के लिए कहा। तब भगवान शिव ने गणेश जी को हाथी का सिर लगा दिया।

यह भी पढें   जनगणना केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं, सुशासन और सामाजिक न्याय की आधारशिला है

परशुराम ने तोड़ दिया था गणेशजी का एक दांत-

भगवान शंकर और माता पार्वती अपने कक्ष में विश्राम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी को भी न आने दें। तभी भगवान शिव से मिलने के लिए परशुराम जी आए। लेकिन गणेश जी से भगवान शिव से मिलने से इनकार कर दिया। इस पर परशुराम जी को गुस्सा आ गया और उन्होंने अपने फरसे से गणेश जी का एक दांत तोड़ दिया।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com