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देशी गाय के घी से होनेवाले फायदा पर डॉ एस के मित्तल के कुछ विचार

 

देशी गाय के घी के विषय में कुछ विचार

देशी गाय का दही बीलो कर निकाला गया घृत अति उत्तम माना गया है। आज चिकित्सक भी इस का ह्रदय रोगियों को भी अनुमोदन कर रहे हैं। वनस्पति घी, विभिन्न खाद्य तेल, क्रीम आदि के सामने घी और भैंस या मिश्रित घी के सामने गाय की ऐक ही नस्ल का दुग्ध, उसका दही, और इस दही से बिलो कर निकाला गया मक्खन और इस मक्खन से निकला घी ही सर्वोत्तम है। आज देश में इस विषय को लेकर बड़ा अज्ञान छा रहा है क्योंकि हर उत्पादक संस्था ‘ देशी गाय के दुग्ध से बिलोया घी ‘ का प्रचार कर रू500/=से रू.2,500/= या अधिक में बेचने का प्रयास कर रही है।

वास्तविकता क्या है?
इसकी लागत क्या है?
क्या मिलावट करने वाला तंत्र जन स्वास्थ्य से खेल कर अनुचित लाभ नहीं कमाएगा?
इसे जन साधारण के लिए कैसे कम किया जाना जरूरी है।
इन सभी विषयों पर कुछ विचार समर्पित हैं
1.ऐक नस्ल की ही गाय का दूध हो ।

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2.उसका सही मानक व विशेष गुण निर्धारित हों।

3. गाय के खान पान का निर्धारण।

4. गाय के दुग्ध में 3% से 5% फेट पाई जाती है। आमतौर पर ऐक किलो घी बनाने में 30किलो दुग्ध का उपयोग होता है।

5. 30किलो दुग्ध यानी रू 12-1500/- जिसका दही जमा कर बिलो कर घी निकालें तो 29किलो दही से बने मट्ठे का क्या करेंगे? अगर 29किलो मट्ठे से छाछ बनाई जाए तो लगभग 150लीटर तक बनाई जा सकती है। अगर इसकी सुंदर 200 एमएल की पेकिंग करें तो 750पैकेट और इनकी बिक्री रू6/- प्रति पैकेट की करें तो रू.4,500/- की बिक्री की जा सकती है । यानी घी तो बिल्कुल निशुल्क मिल सकता है।

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6. 30लीटर दूध में से क्रीम निकाल कर उसे 2किलो दुग्ध में जमा कर दही जमा लें तो 29लीटर दुग्ध तो बेचा जा सकेगा । इस 2/3लीटर दही में से हमे बिलोने के पश्चात 1किलो या ज्यादा घी मिल सकेगा। (मक्खन मिलेगा उसे गर्म कर घी निकालना होगा।) इस तरीके से भी घी की लागत अति कम की जा सकेगी।

7. इस कार्य मै हमे सहकारी संस्था या सव्यम सहायता ग्रुपों का निर्माण करना चाहिए।

8.नस्ल, दुग्ध, फेट, दही, क्रीम, मक्खन, घृत आदि के मानक व गुणवत्ता इस का मुख्य विषय होना चाहिए।

9.अधिकतम मूल्य प्राप्ति हेतु ऐक ब्रांड, ऐक गुण, ऐक दर, ऐक प्रचार आदि हेतु विभिन्न सरकारी संस्था सरकारों का सहयोग यानी देश में स्वेत क्रांति, और गौधन का रक्षण व विकास।

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10.यह सभी पुरातन काल से प्रयोग में लाए जा रहे प्रयोग हैं ।
11.वास्तव में दुग्ध को जब चूल्हे पर अति मध्यम ताप पर रखा जाता है और उसका दही भी हलके गुलाबी झलक देता है। राजस्थान हरियाणा का घी इस ही लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
12.देश में लगभग ७करोड़ गौवंश और इससे 1 लाख किलो लीटर शुद्ध देशी दुग्ध उत्पादन होता है। यानी 3/5हजार टन शुद्ध देशी घृत का नित्य उत्पादन या वर्ष में 180करोड़ किलो।

13.आपको वास्तव मै यह गणना हास्यप्रद लगेगी परन्तु विचारणीय तो अवश्य है। आयिए मिल कर प्रयास करें।

14.मै स्वयं कर्नाटक राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड के माध्यम से कदम बढ़ा रहा हूं।नंदी राष्ट्रीय ग्राम विकास योजना इस की और बढ़ता कदम है।

Dr. SK Mittal, National convener of BJP (cow defence)

 

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