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424 साल पुराना दुर्लभ ताम्रपत्र प्राप्त

 
सांकेतिक तसवीर

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के तिखौन पट्टी के अंतर्गत छाना गांव में एक व्यक्ति के पास से 424 साल पुराना दुर्लभ ताम्रपत्र मिला है। यह ताम्रपत्र तत्कालीन चंद शासक रुद्रचंद ने छाना गांव के तिवारी परिवार के एक पूर्वज को दिया था।

इसमें तीनवीसी भूमि (लगभग 450 नाली) दान करने का आदेश दिया गया था। राज्य पुरातत्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर इस महत्वपूर्ण ताम्रपत्र को अपने रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया है।
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. चंद्र सिंह चौहान को कुछ माह पहले किसी सूत्र ने तिखौन पट्टी के छाना गांव में एक व्यक्ति के पास दुर्लभ ताम्रपत्र होने की जानकारी दी। सही-सही जानकारी नहीं मिलने के कारण पुरातत्व विभाग की टीम काफी समय बाद सही व्यक्ति के पास पहुंच सकी। डॉ. चौहान ने बताया कि छाना गांव के मोहन चंद्र तिवारी के घर में यह दुर्लभ ताम्रपत्र मिला।
16 लोगों को गवाह बनाया गया था
शाके 1518 (1596 ई.) के इस ताम्रपत्र को तत्कालीन राजा रुद्रचंद ने तिवारी परिवार के पूर्वज किशलाकर त्याड़ी (तिवारी) को दिया था। इसमें तिखौन पट्टी में उन्हें तीन वीसी (करीब 450 नाली) भूमि दान में देने का आदेश है। भूमि दान के इस ताम्रपत्र में राज परिवार के लखी चंद (राजा रुद्रचंद के पुत्र लक्ष्मण चंद) सहित 16 लोगों को गवाह बनाया गया था। सभी 16 लोगों के नाम भी ताम्रपत्र में दर्ज हैं।

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ताम्रपत्र में लिखे विवरण के मुताबिक इसे मानिक सुनार नामक व्यक्ति ने लिखा। बता दें कि राजा रुद्रचंद का कार्यकाल 1565 से 1597 तक माना जाता है जबकि उन्होंने 1596 ई. में यह ताम्रपत्र प्रदान किया। ताम्रपत्र का पता लगाने वाली टीम में डॉ. चंद्र सिंह चौहान के अलावा भास्कर तिवारी, चंद्रशेखर उपाध्याय, फोटोग्राफर रणजीत सिराड़ी आदि शामिल थे।
पुरातत्व के महत्व की कई दुर्लभ चीजें बिखरीं होने का अंदेशा
माना जा रहा है कि कुमाऊं क्षेत्र में लोगों के पास कई दुर्लभ ताम्रपत्र और अन्य पुरावशेष हो सकते हैं। दरअसल, लोगों को भय रहता है कि इनके बारे में जानकारी मिलने पर उनके पास रखी दुर्लभ चीज जब्त हो जाएगी, जबकि नियम ऐसा नहीं है। डॉ. चंद्र सिंह चौहान के मुताबिक यदि व्यक्ति स्वेच्छा से इसे पुरातत्व विभाग को सौंपना चाहता हो तो बात अलग है अन्यथा इस तरह की कोई भी दुर्लभ चीजें संबंधितव्यक्ति के पास ही रहती हैं। सिर्फ विभाग के पास इनका रिकॉर्ड रहता है।

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अमर उजाला से

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