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कोरोना संक्रमण के जोखिम में रहे कैदियों को छाड़ने के लिए सर्वोच्च ने सरकार को दिया आदेश

 

काठमांडू, १० सितम्बर । कोरोना संक्रमण संबंधी जोखिम को मध्यनजर करते हुए सर्वोच्च अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि कोरोना संक्रमण संबंधी जोखिम में रहे बंदी–कैदियों को तत्काल रिहा किया जाए अथवा उन लोगों की सजा कम किया जाए । न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल और प्रकाश कुमार ढुंगाना की संयुक्त इलजास ने ऐसा आदेश जारी की है ।
गोपाल सिवाकोटी, राम शर्मा, मानबहादुर राउत जैसे कुछ कानून व्यवसायी की ओर से दायर रिट के ऊपर सुनुवाई करते हुए सर्वोच्च ने कहा है कि महामारी रोकथाम के लिए संक्रामक रोग ऐन, २०२० की दफा २ प्रयोग कर उन लोगों को तत्काल छाड़ना है या सजा कम करना है, जो उपयुक्त है वह करने के लिए सरकार को विशेष निर्णय लेना होगा । इसीतरह कारागार में भीड कम करने के लिए और वैकल्पिक कारागार निर्माण के लिए भी आदेश में कहा गया है ।
सर्वोच्च अदालत ने अपने फैसला में कहा है– ‘कारागार के भीतर नाजुक अवस्था में रहे बाल–बालिका, गर्भवती, शिशू को दूध पिलानेवाली महिला एवं स्वास्थ्य में जटिल समस्या दिखाई देनेवाले व्यक्तियों को प्राथमिकता में रखकर और उन लोगों की परिस्थितियों की पहचान कर एवं स्वास्थ्य जोखिम को भी मध्यनजर कर कसुर की प्रकृति और सार्वजनिक सुरक्षा को भी ध्यान में रखते हुए तत्काल छोड़ना है या सजा कम कराना है, अथवा अन्य कोई निर्णय लेना है, युपर्युक्त विशेष निर्णय के लिए निर्देशनात्मक आदेश जारी की जाती है ।’

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