Thu. May 7th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

चीन में नेपाल के राजदूत पांडे द्वारा नेपाल भारत सम्बन्ध पर दिए गए वक्तव्य पर उठते सवाल

 

क्लिक करें

चीन के सरकारी अखबार को दिए इंटरव्यू में महेंद्र बहादुर पांडे ने चीन-नेपाल रिश्तों की तारीफ की और कहा कि भारत के साथ भारतीय और विदेशी मीडिया चीन-नेपाल रिश्तों को खराब करने की कोशिश में है। केपी ओली सरकार ने अप्रैल में अचानक लीलामणी पौडयाल को बीजिंग से वापस बुलाकर पांडे को भेज दिया था। इस बदलाव को लेकर अभी तक कोई कारण नहीं बताया गया है।

महेंद्र बहादुर पांडे के इस इंटरव्यू की नेपाल में कई तबकों में तीखी आलोचना हो रही है। विश्लेषक, कूटनीतिज्ञ और राजनीतिक दलों के नेताओं ने पांडे के बयानों को गैरकूटनीतिक और प्रोटोकॉल के उल्लंघन वाला बताया  है।

यह भी पढें   नेपाल सरकार प्रतिबद्ध है कि जिस सीमा को लेकर विवाद है वो नेपाल की भूमि है – सस्मित पोखरेल

शेर बहादुर देउवा और सुशील कोइराला के विदेश संबंध सलाहकार रहे दिनेश भट्टराई ने कहा, ”मैं नहीं समझ पा रहा कि क्यों हमारे राजदूत भारत, चीन या किसी ऐसे देश के पक्ष में बात करते हैं जहां वे सेवा दे रहे हैं। जिस तरह की बात पांडे ने की है वह हमें आसानी से मुश्किल में डाल सकता है। हमें यह समझना चाहिए कि भारत और चीन के साथ हमारे रिश्ते पूरी तरह स्वतंत्र हैं और वे एक दूसरे का स्थान नहीं ले सकते हैं।”

विश्लेषकों और मीडिया के अनुसार, ”दुनिया की दो उभरती अर्थव्यवस्थाओं भारत और चीन के बीच  देश के लिए चीन और भारत के बीच बैलेंस बनाना हमेशा कठिन रहा है। विदेश नीति के जानकार हमेशा दोनों पड़ोसी देशों के साथ अच्छे रिश्ते को देश के हित में बताते हैं, लेकिन ओली सरकार के नीतियों पर एक से ज्यादा बार सवाल उठ चुके हैं।”

यह भी पढें   सागर ढ़काल ने ली रास्वपा सचिवालय सदस्य पद की शपथ

काठमांडू पोस्ट के अनुसार  पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के एक नेता ने कहा, ”पांडे सीधा और सपाट बोलने वाले व्यक्ति हैं, लेकिन कूटनीति में यह हमेशा काम नहीं करता है। यदि पांडे भविष्य में भी इसी तरह बोलते रहे तो वह कई देशों के साथ नेपाल का रिश्ता खराब कर देंगे।”

विदेश मामलों के जानकार चंद्र देव भट्ट ने कहा, ”कोई भी कहेगा कि चीन में नेपाल के राजदूत की ओर से दिया गया बयान गैरकूटनीतिक है, लेकिन यदि बारीकी से देखें तो यह बयान नेपाल की विदेश नीति के खिलाफ है। पांडे की ओर से दिए गए सवालों के जवाब देखें तो लगता है कि नेपाल अपने राष्ट्रीय हित की रक्षा में दिलचस्पी नहीं रखता बल्कि दूसरों (चीन) के हितों को पूरा कर रहा है।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *