होश आया तो खुदको अपनी माँ की गोद मेँ पाया : डा.करुणा वन्त
प्यार और इज्जत
होश आया तो
खुदको अपनी माँ की गोद मेँ पाया
समझ बढ़ी तो
पापा को दुसरी माँ के साथ पाया
और बढ़ी, और बढ़ी, तो
खुदको अपने नये घर में पाया
क्या भाया, क्या ना भाया
कुछ पता ना पाया
साल दो साल क्या गुजरे
नन्हें से मुन्ने को अपने गोद में पाया
इस बीच
प्यार और इज्जत
कभी मैने साथ साथ ना पाया
भुले सब, भुले सब, कि प्यार और इज्जत
सदा साथ साथ ही भाया
मुन्नेको अपने मैंने
प्यार और इज्जत साथ–साथ ही करना सिखाया
पापा ने भी उसके मेरी हाँ में हाँ मिलाया
प्यार और इज्जत साथ–साथ करने से
मुन्ना मेरा सभ्य कहलाया



