हुमला जिले के लिमी में सशस्त्र प्रहरी बल का बॉर्डर आउट पोस्ट
कुछ दिनों से देश में सरकार के प्रति आक्रोश देखा जा रहा है । चीन द्वारा नेपाल की धरती अतिक्रमण के प्रयास पर ददेश भर में विरोध प्रदर्शन किया गया है । माना जा रहा है कि विरोध और विपक्ष के दबाव के चलते सरकार ने हुमला जिले के क्षेत्र लिमी में सशस्त्र प्रहरी बल का बॉर्डर आउट पोस्ट बनाने का निर्णय लिया है। बहुत जल्द अतिक्रमित सीमा पर एपीएफ के जवान तैनात हो जाएंगे।
नेपाल के कर्णाली प्रदेश के हुम्ला जिले में 11 साल पहले नेपाल ने लालुंग-लीमी सड़क का निर्माण किया। यह क्षेत्र मानसरोवर झील के पास पड़ता है। स्थानीयवासियों के अनुसार क्षेत्र में बर्फ अधिक होने और किसी के न रहने का फायदा उठाकर चीन ने नेपाल के नक्शे में बने पिलर संख्या 11 को गायब कर दिया।
यहां के लालुंग क्षेत्र में कंक्रीट पत्थर के 11 भवनों का निर्माण किया है जिसे स्थानीय के अनुसार कहा जा रहा है कि वह निर्माण नेपाली जमीन पर है किन्तु सरकार ने इस बात से इनकार कर दिया और कहा कि निर्माण चीन ने अपनी जमीन पर किया है । इस बात की देश भर में काफी आलोचना हुई मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के द्वारा विरोध प्रदर्शन की या गया । नेपाली कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों के दबाव के चलते सीमा के नजदीक उत्तरी नमखा नगरपालिका छह के लिमी में बीओपी बनाने का काम अब अंतिम चरण में है।
ताकची घाटी में बीओपी बनाने का निर्णय लिया गया।
हालांकि ओली सरकार अभी भी इस पोस्ट को खोलने के पीछे जड़ी बूटी और वन्य जीवों की तस्करी बता रही है। नेपाल की भूमि पर चीन के कब्जा किए जाने का मामला राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उछलने के बाद सरकार की खूब आलोचना हुई। जिसके बाद 25 किमी दूर वास्तविक चीन सीमा के लिमी लपचा के ताकची घाटी में बीओपी बनाने का निर्णय लिया गया।लिमी में बनने वाली बीओपी समुद्र तल से चार हजार मीटर की ऊंचाई पर है। इससे पहले 3600 मीटर की ऊंचाई वाले हिलसा में 20 जून को बीओपी खुल चुकी है। जहां निरीक्षक सूरज केसी के नेतृत्व में शसस्त्र प्रहरी बल के 22 जवान तैनात किए गए हैं।

