सात समुंदर पार से.. अंतरराष्ट्रीय लघुकथा वाचन समारोह सम्पन्न
रूपल उपाध्याय,संवाददाता , बडौदा, गुजरात । साहित्य अर्पण साहित्यिक समूह द्वारा अंतरराष्ट्रीय लघुकथा वाचन समारोह आयोजित किया गया। जिसमे भारत देश भूमि से दूर रह रहे भारतीयों ने हिंदी में लिखी अपनी स्वरचित लघुकथा का पाठ किया। कार्यक्रम के सूत्रधार थे अक्स! अनमोल मुदित द्विवेदी दिल्ली से । उषा भदोरिया द्वारा मां सरस्वती के वंदन के बाद कार्यक्रम शुरू हुआ ।।
भारती सिंह जी अफ्रीका से जुड़ी उन्होंने अपनी लघुकथा बदलाव पढ़ कर सुनाई। मनीषा जी ने अपनी लघुकथा एवरेस्ट के माध्यम से संदेश दिया की पहाड़ की चोटी अब कह रही है कि हे मानव ! अब और तेरी गंध नहीं सह सकते । डॉ आस्था नवल जी ने अमेरिका से अपनी लघुकथा बैंच पर बैठा गिरगिट के माध्यम से इंसान की बदलती फितरत को दर्शाया। उषा भदोरिया जी ने लंदन से अपनी लघुकथा बढ़ते कदम के माध्यम से सकारात्मक संदेश दिया कि कैंसर भी इंसान की हिम्मत को तोड़ नहीं सकता। उन्होंने लघुकथा लेखन के बारे में संक्षिप्त में जानकारी दी कि हिंदी साहित्य की सौलह विधाओं में से लघुकथा सबसे प्रभावशाली विधा है जो कलम से सीधे इंसान के दिल और दिमाग पर वार करती है। सिंगापुर से प्रियंका जी ने मोहब्बत की जैकेट लघुकथा का पाठ किया । ऑस्ट्रेलिया सिडनी से सरोजनी नायडू जी ने बहादुर मां लघुकथा का पाठ किया। काठमांडू नेपाल से श्वेता जी ने दो सारगर्भित लघुकथाओ का पाठ किया और अपनी दोनों ही कथाओं में औरत की लाचार्गी को बखूबी पेश किया । घाना से मीनाक्षी सौरभ जी ने लघुकथा ज्ञान के माध्यम से सुंदर संदेश दिया की एक उम्र के बाद ज्ञान से ज्यादा किसी का साथ महत्व रखता है । चित्रा राणा राघव जी ने लंदन से बहुत से लघुकथाकारों के लघुकथा के प्रति समर्पण पर नजर डालते हुए बताया कि आज के समय में लिखी जा रही लघुकथा बहती नदी के समान है कुछ समय के बाद सब कुछ छन कर बहुत सुंदर प्रारूप सामने आएगा । अपनी लघुकथा मासूम जनता का पाठ किया। अमेरिका से शशि जी ने अपनी लघुकथा मंजिले लांघता दर्द का पाठ किया जिसमें पोता दादी के घुटने के दर्द से दुखी होकर कहता है दादी पांच मंज़िल का नहीं एक ही माले का घर बनाऊंगा ताकि आपको कोई परेशानी ना हो । साहित्य अर्पण पत्रिका की संपादक नेहा शर्मा जी ने अपनी लघुकथा में स्वार्थ और आत्मसम्मान की लड़ाई को दर्शाया । कार्यक्रम के अध्यक्ष अनुराग जी ने सकुरा जापानी वनस्पति प्रजाति के माध्यम से बहुत खूबसूरत बात बताई कि जैसे उस वनस्पति में साल में एक बार ही फूल आते है पर उसकी मनोहर याद पूरे साल जापानियों के दिलो में बसती है उसी प्रकार आपका लेखन होना चाहिए चाहे पूरे साल में एक ही कहानी या कविता लिखे मगर वो मारक होनी चाहिए कि जिसकी चर्चा लोग आपस में वर्षों करे । लेखन में रेसोनेंस बहुत जरूरी है। कार्यक्रम का अंत सभी का आभार प्रकट करते हुए नेहा शर्मा जी द्वारा किया गया।
संवाददाता
रूपल उपाध्याय
बडौदा, गुजरात





