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अमेरिकी इतिहास का सबसे विवादित चुनाव : वीरेन्द्र बहादुर सिंह

 
File photo

 

–  वीरेन्द्र बहादुर सिंह, नोएडा, दिल्ली । ऐसा नहीं है कि अमेरिका में चुनाव में पहले कभी विवाद नहीं हुआ। पहले भी विवाद हुए हैं, पर चुनाव प्रचार के दौरान पहले ऐसी बातें कभी नहीं कही गईं, जिससे परिणाम को लेकर संदेह पेदा हो जाए। इस समय जो स्थिति है उससे यही लगता है कि यह चुनाव ऐतिहासिक विवाद वाला तो होगा ही, इसका परिणाम भी विवादित होगा। जिसकी वजह से दुनिया के सबसे जीवंत लोकतंत्र वाले इस देश में सत्ता का हस्तांतरण भी आसानी से नहीं होगा। ट्रम्प ने अमेरिकी चुनाव के साथ जुड़े हर सेलिब्रिटी और संस्था पर हमला कियाा है। उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाया है। उनकी योग्यता और क्षमता को कठघरे में ला कर खड़ा कर दिया है। मतदाताओं के विवेक को चुनौती दी है और मतदान प्रक्रिया को कार्यकारी आदेश से प्रभावित करने का प्रयास किया है।

पिछले चुनाव में यह बात सामने आई थी कि रूस ने अमेरिकी चुनाव को प्रभावित किया था। चुनाव के बाद इस मामले में अनेक तरह की जांच हुई और यह साबित भी हुआ कि टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया का उपयोग कर के मतदाताओं की मानसिकता को खास तरह से प्रभावित किया गया था। इस समय चुनाव के पहले ही राष्ट्रपति ट्रम्प और उनके तंत्र के साथ जुड़े बड़े अधिकारी इस तरह की बातें कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा है कि चीन ने चुनाव को प्रभावित करने की तगड़ी तैयारी कर रखी है। उन्होंने इशारे मे यह भी जता दिया है कि रूस और ईरान भी इसमें शामिल हैं।

सोचिए विश्व का जमादार महाशक्ति देश का राष्ट्रीय सलाहकार इस तरह की बातें कर रहा है। इन बातों का इसके सिवाय कोई हेतु नहीं है कि चुनाव परिणामों को विवादित बनाने के इस तरह के प्रचार से ट्रम्प और उनके सहयोगी अभी से ही अमेरिकी जनता के मन में यह शंका पैदा कर रहे हैं कि दुनिया के देशों, खास कर चीन और रूस चुनाव के परिणामों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस बात को और प्रभावी बनाने के लिए ट्रम्प बारबार डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बीडेन को चीन का आदमी साबित कर रहे हैं।

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अमेरिका में कोरोना वायरस के संक्रमण ने ट्रम्प को ऐसा मौका दिया है कि वह पूरे चुनाव प्रक्रिया को विवादित बना दें। कोरोना के संक्रमण के कारण इस समय मतदान के लिए संभव है पोलिंग बूथ कम बनाए जाएं। अमेरिका मेें भारत की तरह चुनाव आयोग मतदाताओं के लिए बूथ बना कर सरकारी कर्मचारियों को लगा कर मतदान नहीं कराता। वहां लोग स्वयंसेवक के रूप में काम करते हैं। मतदान केंद्रों पर सामान्य आदमी स्वेच्छा से जाकर काम करता है और आत लोग वहां ता कर मतदान करते हैं। इस समय कोरोना के कारण कम ही लोग स्वयंसेवक के रूप में काम करना चाहेंगे, क्योंकि उन्हें संक्रमण का डर रहेगा।

दूसरी ओर बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें लगता है कि मतदान केंद्र कम होने से लंबी-लंबी लाइनें लगेंगी और वहां जा कर मतदान करना यानी कोरोना को निमंत्रण देना है। इसके कारण अधिक से अधिक लोग पोस्टल बैलेट से मतदान का विकल्प पसंद कर रहे हैं। जिसके कारण अमेरिका में एक नई मुश्किल पैदा हो गई है। ज्यादा पोस्टल बैलेट को हैंडल करने के लिए पोस्टल विभाग को अधिक लोगों की जरूरत पड़ेगी। जिसके लिए अतिरिक्त खर्च की जरूरत पड़ेगी, साथ ही मूलभूत जरूरतें पूरी करने के लिए भी खर्च की जरूरत पड़ेगी। परंतु ट्रम्प ने अतिरिक्त पैसे देने से मना कर दिया है। अमेरिकी पोस्टल सेवा की इमरजेंसी जरूरतों के लिए 25 अरब ढालर देना था और राज्यों के चुनाव के कामकाज की जरूरत के लिए 3-5 अरब डालर देना था।

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कोरोना राहत पैकेज में ही इस रकम को शामिल करना था और डेमोक्रेटिक पार्टी ने इसके लिए जरूरी दबाव भी बनाया था, पर ट्रम्प ने पैसा नहीं दिया। जिसका परिणाम यह हुआ कि बड़ी संख्या में लोगों के बैलेट को एकत्र करना और गिनती करने के लिए समय से पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। अनेक जगहों पर चुनाव की तारीख के दो दिन बाद तक पोस्टल बैलेट पहुंचने की छूट है। अगर ये पोस्टल मत समय से मिनती के लिए नहीं पहुंचे तो अमान्य कर दिए जाएंगे। पिछली बार इसी वजह से 6 लाख मत बेकार हो गए थे। जिन्हें अगर गिनती में ले लिया जाता तो परिणाम अलग भी हो सकते थे। जो पोस्टल बैलेट पहुंच जाएंगे, उनकी गिनती में भी काफी समय लगेगा। ऊपर से ट्रम्प अभी भी पोस्टल बैलेट से मतदान पर अविश्वास जाहिर करते हुए बारबार कह रहे हैं कि डेमोक्रेट इसमें गड़बड कर रहा है। उन्होंने अपने आरोप को और मजबूती देने के लिए अनेक राज्यों के अपने समर्थकों से कहा है वे कि दो बार मतदान करें। एक बार पोस्टल बैलेट से और दूसरी बार मतदान केंद्र पर जा कर। इस तरह वह चुनाव की पूरी प्रक्रिया को अविश्वसनीय और विवादित बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

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चुनाव हार जाने की चिंता में ट्रम्प बारबार कह रहे हैं कि मतदान डिसरप्ट हो सकता है यानी कि मतदान में गड़बड़ी हो सकती है। जैसे-जैसे देश का मूड उनके खिलाफ हो रहा है और सर्वे में वह पीछे जा रहे हैं, वैसे-वैसे इस मामले में आशंका बढ़ती जा रही है कि वह अपने समर्थन वाले राज्यों मेे खास कर के फ्रलोरिडा आदि में जानबूझ कर गड़बड़ करा सकते हैं। जिससे चुनाव प्रक्रिया रुक जाए और लोगों का विश्वास बढ़े। ट्रम्प के वित्तीय पोस्टमास्टर जनरल लुईस डिजोय को ले कर भी आशंका व्यक्त की जा रही है। माना जा रहा है कि वह पोस्टल बैलेट मतदान की प्रक्रिया को सफल नहीं होने देना चाहते। जिससे लोगों से अपने आसपास के पोस्टबाक्स पर नजर रखने के लिए कहा गया है।

अमेरिकी बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्त्ता लोगों से निवेदन कर रहे हैं कि मतदान प्रक्रिया में अधिक से अधिक लोग स्वयंसेवक के रूप में जुड़ें। म तदान केंद्र बनाने में मदद करें। उन्हें संक्रमणमुक्त रखने में मदद करें और लोगों को भरोसा दिलाएं कि मतदान केंद्र पर मतदान करना सुरक्षित है। लोगों से अपील की जा रही है कि चाहे जैसे भी हो, वे मतदान केंद्रों पर पहुंच कर वोट करें। अमेरिकियों को इस बात की चिंता सता रही है कि सदियों के संघर्ष से जो अमेरिका बना है, उसे ट्रम्प खत्म कर रहे हैं। वह ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ के नाम से अमेरिका को कलंकित कर रहे हैं। उन्होंने लोकतंत्र के उत्सव को विवादित चुनाव अभियान में बदल दिया है।

वीरेंद्र बहादुर सिंह
जेड 436ए, सेक्टर 12ए नोएडा,गौतम बु( नगर, पिन: 201301

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