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शारदीय नवरात्रि में दुर्गा अश्व पर आरूढ़ होकर आएगीं, हाथी पर होगा प्रस्थान : राज शर्मा

 

शारदीय नवरात्रि में बन रहे हैं शुभकारक संयोग 17 अक्टूबर से होगा शुभारम्भ:-

माँ दुर्गा का परम प्रिय महापर्व महोत्सव नवरात्रि का शुभारंभ इस वर्ष 17 अक्टूबर से होने जा रहा है । नवरात्र शब्द से तात्पर्य ‘नव अहोरात्र’ अर्थात विशेष रात्रियों के बोध का सूचक । माँ दुर्गा को समर्पित इन विशेष दिव्य रात्रियों में प्रकृति के बहुत सारे अवरोध अनायास ही नष्ट हो जाते हैं। व्यवहारिक दृष्टिकोण से भी अगर देखा जाए तो रात्रि के समय ध्यान करने से शून्य व्यापी तरंगे ब्रह्म का साक्षात्कार करवा देती है। नव रात्रियों में किए गए शुभ संकल्प सिद्ध होते हैं।
शारदीय नवरात्रि का यह अलौकिक महापर्व 17 अक्टूबर से 24 अक्टूबर तक रहेगा। इस बार नवरात्रि के प्रारम्भ में 17 तारीख को ही सूर्य का राशि परिवर्तन भी होगा। 17 तारीख को सुर्य तुला राशि में प्रवेश करेगा। तुला राशि में पहले से वक्री बुध भी वक्री चल रहा है। इस कारण इस नवरात्रि इस बार “बुध-आदित्य” योग बनेगा। साथ ही 58 साल बाद शनि-गुरु का भी दुर्लभ योग बन रहा है।
नवरात्रि काल में शनि मकर राशि में और गुरु धनु राशि में रहेगे। ये दोनों ग्रह 58 वर्षों के पश्चात इस नवरात्रि में एक साथ अपनी-अपनी राशि में स्थित रहेंगे। 2020 से पहले सन 1962 में इस तरह का योग बना था। सन 1962 की समय अवधि को 29 सितंबर से नवरात्रि की शुरूआत हुई थी।

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● नवरात्रि घट स्थापना मुहूर्त-

●अभिजित मुहूर्त

दोपहर 11:41 मिनट से 12:27 मिनट तक।

●अन्य मुहूर्त-

प्रात: 07:45 मिनट से 09:11 मिनट तक
प्रात: 12:00 बजे से 04:30 मिनट तक।

●संध्याकालीन मुहूर्त-

सायं 6:00 बजे से 7:30 मिनट तक।

●रात्रिकालीन मुहूर्त- ( तन्त्र साधना हेतु)

रात्रि 9:00 बजे से 12:04 मिनट तक।

●किन लग्नों में घट स्थापना करने से क्या फल मिलता है -:

माँ जगदम्बा की पूजा में शुद्ध मुहूर्त एवं शास्त्रोक्त पूजन विधि का बहुत महत्व है। संहिताओं में विविध लग्नानुसार घट स्थापना का फल निर्धारण किया गया है:-

●शुभ लग्न-

१-मेष लग्न – (धनलाभ देने प्रदान करने वाला)-  06:07 मिनट से 7:44 मिनट तक।
२-कर्क लग्न-( सिद्धि की प्राप्ति) -11:57 मिनट से 02:12 मिनट तक।
३-कन्या लग्न- (अचल लक्ष्मी की प्राप्ति)- सुबह 04:29 से 06:44 मिनट तक।
४ -तुला लग्न- (ऐश्वर्य की प्राप्ति करवाने वाले ) – 06:44 मिनट से 09:02 मिनट तक।
५-वृश्चिक लग्न- ( अपार धन-लाभ)-  09:02 मिनट से 11:19 मिनट तक।
६-मकर लग्न-( पुण्य लाभ )-01:24 मिनट तक। 03:09 मिनट तक।
७-कुंभ लग्न- (धन-समृद्धि की प्राप्ति) – 03:09 मिनट से 04:40 मिनट तक।

●इन लग्नों में कदापि न करे घट स्थापना

१-वृष लग्न- कष्ट कारक
२-मिथुन लग्न- संतान सम्बंधित कष्ट
३-सिंह लग्न- बुद्धि का नाश
४-धनु लग्न- मानभंग
५-मीन लग्न- हानि एवं दुःख की प्राप्ति होती है।

●किस दिन कौन से नवरात्रि की तिथि रहेगी
(पंचांग के शुद्ध गणना अनुसार)

17 अक्टूबर:- शनिवार:- पहला :- शैलपुत्री पूजा (घटस्थापना)
18 अक्टूबर: रविवार:- दूसरा:- ब्रह्मचारिणी पूजा
19 अक्टूबर: सोमवार:-तीसरा:- चंद्रघंटा पूजा
20 अक्टूबर: मंगलवार:- चौथा:- कुष्मांडा पूजा
21 अक्टूबर: बुधवार:- पांचवा:- स्कंदमाता पूजा (सरस्वती आवाहन)
22 अक्टूबर:  बृहस्पतिवार:-छठा एवं  सातवां:- कात्यायनी और कालरात्रि पूजा
23 अक्टूबर: शुक्रवार:-आठवां:- महागौरी पूजा
24 अक्टूबर: शनिवार:-नवम :- दुर्गा महा नवमी :- सिद्धिदात्री पूजा
25 अक्टूबर: रविवार:- नवरात्रि पारणा :-  विजय दशमी:- दुर्गा विसर्जन

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●नवरात्रि में ये योग रहेंगे विशेष शुभकारी

17 अक्टूबर को नवरात्रि की घटस्थापना के समय सर्वार्थ सिद्घि योग रहेगा । इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्घि योग 19 अक्टूबर, 23 व 24 अक्टूबर को भी रहेगा। इसके बाद 18 व 24 अक्टूबर को रवि सिद्घि महायोग भी रहेगा। 19 अक्टूबर को सर्वार्थ सिद्घि योग के साथ द्विपुष्कर योग एवं 20 को सौभाग्य योग एवं 21 को ललिता पंचमी, बुधवार को सोभन योग का दुर्लभ संयोग रहेगा।

● किस वाहन पर होगा जगदम्बा का आगमन एवं प्रस्थान

देवी भागवत पुराण में वर्णन आया है कि नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा का आगमन से भविष्य में होने वाली घटनाओं के संकेत के रूप में भी देखा जाता है। प्रत्येक वर्ष नवरात्रि में देवी दुर्गा का आगमन अलग-अलग वाहनों में होता हैं और उसका अलग-अलग महत्व  एवं फल भी होता है। शरद ऋतु में आगमन के कारण ही इसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। इस बार मां दुर्गा का आगमन अश्व यानि घोड़े पर होगा। जबकि माँ दुर्गा प्रस्थान हाथी पर करेंगी।
“शशि सूर्य गजरुढा शनिभौमै तुरंगमे। गुरौशुक्रेच दोलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता”॥ इस श्लोक के अंतर्गत सप्ताह के सातों दिनों के अनुसार देवी के आगमन का अलग-अलग वाहन बताया गया है। अगर नवरात्र का आरंभ सोमवार या रविवार को हो तो इसका मतलब है कि माता हाथी पर आएंगी।
शनिवार और मंगलवार को आश्विन शुक्ल प्रतिपदा यानी कलश स्थापना हो तब माता अश्व यानी घोड़े पर सवार होकर आती हैं। गुरुवार या शुक्रवार को नवरात्रि का आरंभ हो रहा हो तब माता डोली पर आती हैं। बुधवार के दिन नवरात्र पूजा आरंभ होने पर माता नाव पर आरुढ़ होकर आती हैं।

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●दुर्गा के वाहन का प्रभाव

इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का आरंभ शनिवार को हो रहा है। ऐसे में देवीभाग्वत पुराण में वर्णित श्लोक के अनुसार माता जगदम्बा का वाहन अश्व होगा। अश्व पर माता का आगमन छत्र भंग, पड़ोसी देशों से युद्ध, आंधी तूफान, भूकम्प,किसी बड़े देश से विश्वासघात मिलने के योग को दर्शाता है। ऐसे में आने वाले वर्ष में कुछ राज्यों की सत्ता में उथल-पुथल हो मच सकती है। सरकार को किसी बात से जन विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है। कृषि के मामले में आगामी वर्ष सामान्य रहेगा। देश के कई भागों में कम वर्षा होने से कृषि कार्य में हानि और किसानों को परेशानी होगी।

राज शर्मा (संस्कृति संरक्षक एवं ज्योतिष मर्मज्ञ)
आनी कुल्लू हिमाचल प्रदेश
sraj74853@gmail.com

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