नेपाल में रेलमार्ग संचालन संबंधी विषयों में नेपाल–भारत के अधिकारी बीच विचार–विमर्श
काठमांडू, २० नवम्बर । रेलवे सहकार्य संबंधी विषयों को लेकर भारत–नेपाल के अधिकारियों के बीच आज वीडियो–कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक बैठक आयोजन हुआ है । संयुक्त कार्यदल की बैठक यह ४वीं बैठक भी है । बैठक में जयनगर–बिजलपुरा–बर्दिबास और जोगबनी–विराटनगर के बीच निर्माणाधीन सीमापार रेललिंक (३४ कि.मी.) परियोजनाओं की समीक्षा हुई है ।
इसीतरह नेपाल रेलवे कंपनी की ओर से यात्रुबाहक रेल सेवा संचालन के लिए आवश्यक स्ट्याण्डर्ड ऑपरेटिङ प्रोस्युडर्स (एसडीपी) संबंधी विषय में बैठक में चर्चा की गई । स्मरणीय है, तत्कालीन ब्रिटिश इन्डिया सरकार द्वारा ‘न्यारो गेज’ में निर्मित इस रेलमार्ग को भारत सरकार ने स्तरोन्नति किया है, इसकी लागत भारतीय रुपये ३८० करोड है । रेलवे लिङ्क में सेवा सञ्चालन के खातिर नेपाल सरकार ने भारत से दो डीईएमयू रेल सेट खरिद किया है । भारतीय रुपीये २०० करोड लागत में कुर्था–बिजलापुर तक की निर्माण सम्पन्न करने के लिए भी दोनों पक्ष के बीच आपसी विमर्श हुई है ।
इसीतरह रेल सेवा में कार्यरत नेपाली कर्मचारियों में क्षमता विकास के लिए भी कार्यकाद के दो अध्यक्ष के बीच सहमति बनी है, नेपाल सरकार की आवश्यकता अनुसार कर्मचारियों को नेपाल और भारत में प्रशिक्षण प्रदान की जाएगी ।
बैठक में भारतीय पक्ष का नेतृत्व डॉ. मनोज सिंह किया, सिंह भारतीय रेल मंत्रालय के कार्यकारी निदेशक (ट्रैफिक ट्रांसपोर्टेशन–एफ) हैं । इसीतरह नेपाल पक्ष का नेतृत्व गोपाल प्रसाद सिग्देल ने किया, सिग्देल नेपाल सरकार भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात मन्त्रालय के सह–सचिव हैं । बैठक में भारत की ओर से भारतीय रेल विभाग प्रतिनिधि, विदेश मन्त्रालय अधिकारी, काठमांडू स्थित भारतीय राजदूतावास के प्रतिनिधि, कोंकण रेलवे तथा आईसीएन के वरिष्ठ अधिकारी आदि सहभागी थे । नेपाल की ओर से रेल विभाग के महानिर्देशक, नेपाल रेलवे कम्पनी के महाप्रबन्धक, नेपाल सरकार गृह मन्त्रालय एवं परराष्ट्र मन्त्रालय के अधिकारी उपस्थित रहे ।

