मन की शांति-तन की शांति : कमला भंसाली जैन।
(मन की शांति) मन की शांति-तन की शांति, पाना चाहतें हैं। कैसे मिले-कहां मिले? वो खजाना चाहतें हैं। खुद का करें बदलाव, मन की चंचलता ही , है तनाव प्रवृत्तियों का बोझ भारी दुष्प्रभाव निवृत्तियों से मिलेगा समभाव कथनी -करनी में जब तक- नही होगी समानता, तब -तक नही मिटेगी- भेद -भाव की असमानता। स्थितियां बदलने की कोशिश, करली बार हजार, पर समस्या ज्यों की त्यों तैयार दिनोंदिन ढीले पड़ रहे हैं संकल्प फैल रही अशांति -अप्रिय-अकम्प अगर हिंसाअनैतिकता में खोजेंगे शांति का सागर तो जल मथने से भरजायेगी घी से गागर, ऐसा न कभी हुआ न होगा, अहिंसा-प्रेम-सद्भावना अपनाएं शांति-शान्ति-विश्वशांति पाएं।
कमला भंसाली जैन।

