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“कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना” नितीशकुमार की अधिकार रैली

नवीनकुमार नवल:मार्च विहारबासियों का जो पर्रदशन रामलीला मैदान, दिल्ली मेंं नितीशकुमारके नेतृत्व में किया गया, राजनीति विशेषज्ञों द्वारा उसके कई मतलव निकाले जा रहे हैं। एक तो नितीशकुमार को नरेन्द्र मोदी की तरह प्रधानमन्त्री के लाइन मेंं खडा होना, दूसरा काँग्रेस से नजदिकी बढÞाना, तीसरा विहारको विशेष राज्यका दर्जा दिलाकर आने वाले लोकसभा एवं विधानसभा मेंं अपने आपको सुरक्षित करना।

Nitish_Kumar
“कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना” नितीशकुमार की अधिकार रैली

नितीशकुमार का इतिहास देखा जाये तो विहारके विकास पुरुष का तग्मा वे अपने नाम कर चुके हैं। विकास की परिभाषा इस कदर गाढÞी गई कि विकास पुरुष का ताज नितीशकुमारको दे दिया गया हैं। सडक से आगे विकास का कोई गाथा नजर नहीं आता। शिक्षा का साइकिल और पोशाक से आगे कोई सरोकार नहीं हैं। खिचडÞी की योजना विद्यार्थीको स्कूल मेंं तो खिंच लाती है पर स्कूली शिक्षा के नाम पर हवा हवाई जैसा ही माहौल है। २००५ से अब तक जिसे शिक्षक का नाम देकर विद्यालय में पढाने का काम दिया गया हैं आज वही शिक्षक नितीश कुमार की सभा में जूत्ता और चप्पल लहराते हैं। प्रखण्ड से लेकर राजधानी तक विरोध व बन्दीका पर््रदशन करते हैं। अफशोस, बात तो वही जाकर रुकती है, जो विद्यार्थी के लायक भी नहीं था, उसे शिक्षक बनानेका हश्र क्या होता है – जूत्ते चप्पल पर नितीशकुमार विफर पडते हैं, लाजीमी भी हैं। लेकिन वोट चीज ही ऐसी होती है, कुछ भी करना पडÞे तो कोई बात नहीं सब जायज होता है।
बिहारके मुख्यमन्त्री की गद्दी ही ऐसी है पता नहीं क्यो इस गद्दी पर बैठते हीं प्रधानमन्त्रीकी कर्ुर्सर्ीीी नजदीक दिखने लगती है। भले ही कर्ुर्सर्ीीावें न पावें। लालू यादवके साथ भी यही हुआ था। नितीश कुमार भी मिलाजुला कर यही सपने देखते और सोचते भी हैं। आरएसएस एवं जदयू पार्टर्ीीर्ी नितीश कुमारको विकास पुरुष वताकर प्रधानमन्त्रीके लायक बता रही हैं। लेकिन नरेन्द्र मोदी से तुलना करने पर कौन किसपर भारी पडेगा, वह २०१४ की लोकसभा चुनाव मेंं जनता जनताजनार्दन ही बतायेगी। फिर भी विहार और गुजरात की तुलना करें तो गुजरात मेंं शराव पर पावंदी है तो बिहार में हर तीन किलोमिटर पर शराब की दूकान मिलेगी। जिसके गिरफ्त में हर नवयुवक आ चुका हैं। यही है विहार की विकास की नई गाथा। जिस राज्यके लोग आज भी भूखे सोते हैं उस राज्यके मुख्यमन्त्री विशेष राज्यके लिए अधिकार रैली दिल्ली तक करते हैं पर नितीशकुमारको कौन समझाएगा कि दिल्ली कि गद्दी अभी बहुत दूर है। भावनाओं को यथार्थ की राजनीति से जोडÞना होगा नहीं तो उदाहरण के लिए लालू यादव खडे हैं।
नितीश कुमार ीे लोकप्रियता पर वट्टा तो जरुर लगा है। पहले जिस चिज को नितीश कुमार की मजबुती मानी जाति थी, वही चीज उनकी कमजोरी बनती जा रही है। दरभंगा मधुवनी से लेकर आरा की घटना इस के उदाहरण हैं। पिछले पञ्चवषर्ीय शासनकी तुलना मेंं यह पञ्चवषर्ीय वर्षउनका कमजोर होता जा रहा है। नितीश कुमार का विशेष राज्य का दर्जा के लिए अधिकार रैली ‘कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना’ को जरुर दर्शाता है। पडोसी देश नेपाल के लोग भी सडÞकको देखने से विकासके लिए नितीश की प्रशंसा करने में पीछे नहीं हैं। लेकिन विहार के लोग भी सडÞक को छोडÞकर शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली के मामले में सन्तुष्ट नहीं हैं।
यही है विहार, जहाँ के लोगों की इज्जत दुनिया में बढÞी है पर विहार की तरफ देखने बालो का नजरिया बदलना अभी भी बाँकी है।

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