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यादों के झरोखे से

 

यादों के झरोखे से
बताओ तो किस-किस के लिए
तुम दौडÞ गए,
करुणा के दृश्यों से हाय,
मुँह मोडÞ गए
बन गए पत्थर,
बहुत-बहुत ज्यादा लिया,
दिया बहुत-बहुत कम,
मर गया देश,
अरे ! जीवित रह गए तुम !
-गजानन माधव ‘मुक्तिवोध’kabita2

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