Fri. Sep 4th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

क्या भारत का लोकतंत्र फर्जी है ? : डॉ. वेदप्रताप वैदिक

 

*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* भारत के किसानों ने विपक्षी दलों पर जबर्दस्त मेहरबानी कर दी है। छह साल हो गए और वे हवा में मुक्के चलाते रहे। अब किसानों की कृपा से उनके हाथ में एक बोथरा चाकू आ गया है, उसे वे जितना मोदी सरकार के खिलाफ चलाते हैं, वह उतना ही उनके खिलाफ चलता जाता है।

अब विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी किसानों की बजाय भारत के राष्ट्रपति के पास पहुंच गए। कहते हैं कि किसान-आंदोलन के पक्ष में उन्होंने दो करोड़ हस्ताक्षरवाला ज्ञापन राष्ट्रपति को दिया है। दो करोड़ तो बहुत कम हैं। उसे 100 करोड़ भी कहा जा सकता था। यदि दो करोड़ लोगों ने उस पर सचमुच दस्तखत किए हैं तो राहुलजी उनमें से कम से कम दो लाख लोगों को तो दिल्ली ले आते। उनकी बहन प्रियंका को पुलिस ने पकड़ लिया। उस पर उनकी आपत्ति ठीक हो सकती है लेकिन इसीलिए आप यह कह दें कि भारत का लोकतंत्र फर्जी है, बनावटी है, काल्पनिक है, बिल्कुल बेजा बात है। भारत का लोकतंत्र, अपनी सब कमियों के बावजूद, आज भी दुनिया का सबसे बड़ा और बहुत हद तक अच्छा लोकतंत्र है। राहुल का यह कहना हास्यास्पद है कि मोदी का जो भी विरोध करे, उसे आतंकवादी घोषित कर दिया जाता है। वैसे सिर्फ कहलवाना ही है तो विदूषक कहलवाने से बेहतर है— आतंकवादी कहलवाना लेकिन भारत में आज किसकी आजादी में क्या कमी है ?

यह भी पढें   नेपाल की रसुवा बाढ़: दक्षिण कोरिया भेजेगा 44 सदस्यीय राहत एवं बचाव दल

जो भी जो चाहता है, वह बोलता और लिखता है। उसे रोकनेवाला कौन है ? जो अखबार, पत्रकार और टीवी चैनल खुशामदी हैं, डरपोक हैं, कायर हैं, लालची हैं— वे अपना ईमान बेच रहे हैं। वे खुद दब रहे हैं। उन्हें दबाए जाने की जरुरत नहीं है। उन्हें दबाया गया था, आपात्काल में, राहुल की दादी के द्वारा। पांच-सात साल के राहुल को क्या पता चला होगा कि काल्पनिक लोकतंत्र कैसा होता है ? जहां तक पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र का सवाल है, युवराज की हिम्मत नहीं कि इस सवाल को वह कभी छू भी ले। नरसिंहराव-काल को छोड़ दें तो पिछले 50 साल में कांग्रेस तो एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनकर रह गई है। उसमें अब भी बड़े योग्य और प्रतिभाशाली नेता हैं लेकिन उनकी हैसियत क्या है ? यही कांग्रेसी-कोरोना देश के सभी दलों में फैल गया है। पार्टियों के आतंरिक लोकतंत्र का खात्मा ही बाह्य लोकतंत्र के खात्मे का कारण बनता है। www.drvaidik.in

यह भी पढें   प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह संयुक्त राष्ट्र संघ के ८१वें महासभा में भाग लेंगे
डॉ. वेदप्रताप वैदिक,
Most Senior Journalist

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com