अब न मधेसी खून बहना, अपनी चौक चौराहों पर : अजयकुमार झा
सावधान युवाओं!
अब न मधेसी खून बहना, अपनी चौक चौराहों पर।
घर घर मे गद्दार भड़ा है, पार्टी भ्रष्ट आचारों पर।।। 1
लूट रहा है देस को इसने, कोरोना के अफवाहों पर।
तड़प रही है जनता प्यारे, खुद अपनी संस्कारों पर।।। 2
अब नही भेड़ा बनना तुमको, मरना नही इशारों पर।
पलपल का रखना हिसाव,अब श्रद्धा नही सरकारों पर।।। 3
नर पिशाच है नेता अपना, जीते हैं अफवाहों पर।
खुदकी गठरी बाँध के तुझको, बुला रहा चौराहे पर।।। 4
देखो फिर आन्दोलन होगा, तुमको गले लगाएंगे।
बना सहीद वो मौज करेंगे,
तुमको नाच नचाएंगे।। 5
दे के हवाला क्रान्ति का, युवा को कष्ट दिलाएंगे।
धूमिल बना तेरी ऊर्जा को, लाश पे वो मुसकाएंगे।। 6
भीतर भीतर मिले हैं प्यारे, बाहर नाटक करते हैं।
स्वार्थ सिद्धि में एक हैं सारे, देश के घातक लगते हैं।। 7
लूट रहे मिलकर ए हमको, हम ही को धोखा देते हैं।
हमें लड़ा के शहीद बनाके, हम हीं को बोका कहते हैं।। 8
सावधान हो सावधान अव, होश न खोना जोशों में।
पद हेतु फिर तांडव होगा, कूद न पड़ना रोशों में।। 9
नहीं एक भी है यहां नायक, खलनायक के मेलों में।
बना के तुझको वो नालायक, पहुंचा देगा जेलों में।। 10
तुम्हें लात से स्वागत होगा, वो बोतल ले नाचेगा।
किसे फसाना कहां मिटाना, इस षड़यंत्र को सांचेगा।। 11


