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कानून की परिभाषा बदलने की जुर्रत कौन करे : रविन्द्र डोगरा

 

हवाला देकर ” दफ़ाओं “का छोड़ना मुनासिब नहीं गुनेहगार को , बेहतर था के इंसाफ की किताब में चंद हर्फ और जोड़ता मुंसिफ ।। ” पॉक्सो एक्ट “

आजकल बाम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बैंच के एक फैंसले की निंदा पूरे भारत में हो रही है और वह फैंसला है 19 जनवरी को पॉक्सो एक्ट के तहत अपराधी को बरी करने का । जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला की सिंगल बेंच ने लड़की से यौन अपराध के मामले में अपराधी को यह कहते हुए बरी कर दिया के पॉक्सो एक्ट के तहत ” बिना टॉप उतारे ब्रेस्ट छूना यौन हमला नहीं ” । दोस्तों यहाँ यह बात अहम हो जाती है के क्यों एक महिला जज ने एक लड़की के साथ हुए यौन अपराध पर अपने फैंसले में अपराधी को बरी कर दिया ….? गौर कीजिए इस बात पर के जज साहिबा ने अपराधी को इसलिए बरी किया था , क्योंकि ” पॉक्सो एक्ट ” में बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध को परिभाषित कर सज़ा का प्रावधान दिया गया है और बकौल जस्टिस पुष्पा जी एक्ट में लिखा है के , Groping a Minor’s Breast ” without skin to skin Contact ” Can’t be termed as Sexual Assault , “.।। भले ही लोग महिला जज को और उसके फैंसले को गलत बता रहे हैं और न्यायपालिका के प्रति अधिकतर लोगों का नजरिया बदल गया है इस फैंसले के बाद ( हालांकि भारत के अटार्नी जर्नल ने माननीय सुप्रीमकोर्ट में फैंसले के खिलाफ़ अर्ज़ी दाखिल कर दी है और उसे स्वीकार भी किया जा चुका है ) । लेकिन सोचने वाली बात तो यह है की , फैंसले के खिलाफ़ या जज के खिलाफ़ तो आपने अपील दॉयर कर दी पर क्या किसी बुद्धिजीवी ने पॉक्सो एक्ट की उस बात के खिलाफ़ अपील दॉयर की जिसमें लिखा है के , Groping a Minor’s Breast ” without skin to skin Contact ” Can’t be termed as Sexual Assault , “. जी हाँ प्यारे दोस्तों यही लाख रूपये का सवाल है , बजाय जज या उसके फैंसले खिलाफ़ जाने के हमें ” पॉक्सो एक्ट ” में लिखी इस लाईन के खिलाफ़ जाना चाहिए था जो किसी ने नहीं किया । होना ये चाहिए था के हमें पॉक्सो एक्ट में संशोधन की मांग भी रखनी चाहिए थी ताकि भविष्य में बच्चों के साथ अपराध करने वाले बच ना सकें लेकिन अफसोस इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया । ध्यान रहे महिला जज ने वही कहा और किया जो पॉक्सो एक्ट में कानून ने परिभाषित किया है ।

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इसलिए आज जरूरत है उस कानून की परिभाषा को बदलने की जिसे पढ़कर जज फैंसले सुनाते हैं । बाक़ी मर्जी है आपकी , मेरे पास तो दिमाग़ कम है तो सोचा आपसे पूछ लूं ..।।

रविन्द्र सिंह डोगरा – हमीरपुर, हिमाचल निवासी-समाज सेवी एवं विचारक हैं।

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