Wed. Feb 21st, 2024

उस आईने की आज भी दुनियाँ में कद्र है, जिस आईने में आप का अक्शों जमाल है : अब्दुल लतीफ शौक

बाँके/ नेपालगंज



पवन जायसवाल

गुल्जार–ए– अदब नेपालगन्ज के अध्यक्ष हाजी अब्दुल लतीफ शौक द्वारा प्रस्तुत किया गया गजल ।
बिजली नई गिराने का शायद ख्याल है
क्यों आँशियाँ आज बडी देख भाल है ।
जिसजाँ चुनूँ मैं आँशियाँ मेरा ख्याल है
सय्यद ने बिछाया वही अपना जाल ।
उस आईने की आज भी दुनियाँ में कद्र है
जिस आईने में आप का अक्शों जमाल है ।
गुलशन में जितने फूल थे मुर्झा गए है सव
देख ऐ बहार तेरी अना का सवाल है ।
शायद तुम्हारा तीरे नजर काम कर गया
कैसे बताऊँ कैसा मेरे दिल का हाल है ।
आतिश कदा जो शौक है गुलजार हो गया
सव जानते हैं सिर्फ रब का ख्याल है ।



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