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बिहार : गोपालगंज के अस्‍पताल में एलियन बेबी का जन्‍म, देखने के लिए नर्सिंग होम में भीड़

 

 

गोपालगंज के मीरगंज थाना क्षेत्र के साहिबा चक्र गांव निवासी चुनचुन यादव की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर स्वजनों ने बुधवार की शाम में हथुआ अनुमंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया। गुरुवार की सुबह महिला ने एक विचित्र बच्चे को जन्म दिया। बच्चे की दोनों आंखें बड़ी-बड़ी व सुर्ख थीं। ऊपर के जबड़े में वयस्कों की तरह दांत थे। शरीर पर सफेद रंग का अलग तरह का आवरण था। जिसने भी बच्‍चे को देखा, दूसरे ग्रह से आया प्राणी समझ बैठा।

बच्चे को देखकर प्रसव कक्ष में मौजूद स्वास्थ्य कर्मी सहम गए। उसे देखने के लिए अस्‍पताल में भीड़ उमड़ पड़ी। हालांकि, जन्म के ढ़ाई घंटे बाद उसकी मौत हो गई। बच्चे को जन्म देने वाली महिला को इसके दो साल पहले एक सामान्‍य बच्चा हुआ था, लेकिन एक सप्ताह बाद उसकी मौत हो गई थी। विचित्र बच्चे को जन्म देने वाली महिला स्वस्थ हैं। अस्पताल में चिकित्सक उसके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं।

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विदित हो कि बिहार में एलियन जैसे दिखने वाले विचित्र बच्‍चे पहले भी मिलते रहे हैं। इसका कारण माता-पिता में जेनेटिक म्‍यूटेशन होता है। ऐसे बच्चे अधिकतम कुछ दिनों तक जिंदा रह पाते हैं, क्योंकि उनके सभी अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते हैं। ऐसे बच्चों के शरीर के उपर एक लेयर होता है, जिससे त्वचा आक्सीजन नहीं ले पाती है। यह ‘हर्लेक्विन इचथिस्योसिस’ की बीमारी होती है।

जहां तक विचित्र बच्‍चों की बात है, हाल ही में 13 फरवरी को आरा के अस्पताल में एक विचित्र बच्ची का जन्म हुआ था। डॉक्‍टरों ने बताया कि जीन म्यूटेशन के कारण बच्चे का सिर बढ़ गया था। बाद में बच्‍ची की मौत हो गई।

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‘हर्लेक्विन इचथिस्योसिस से पीडि़त बच्‍चों की बात करें तो 21 फरवरी 2017 को भागलपुर के तातारपुर स्थित एक निजी नर्सिंग होम में ऐसे एक अजीब बच्‍चे का जन्‍म हुआ था। विचित्र बच्‍चे के जन्म की खबर सुनकर नर्सिंग होम में भीड़ जुट गई थी।

 

कटिहार में 19 मार्च 1917 को हरे रंग के बच्‍चे की जन्‍म हुआ था। सिर व आंख, नाक, कान और हाथ पूरी तरह विकसित नहीं थे तथा शरीर पर कछुए की तरह धारीदार आकृति बनी थी।

पटना की बात करें तो यहां भी चार साल पहले ऐसे बच्‍चे का जन्‍म का जन्‍म हुआ था। पटना के पालीगंज अस्‍पताल में पालीगंज के आजिम नगर कॉलनी की रहने वाली एक महिला ने एलियन जैसे बच्चे को जन्म दिया था। बच्‍चे की आंख, नाक, कान और हाथ अविकसित थे। इस अजीबोगरीब बच्‍चे को देख कर मां भी डर गई थी।

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ये तो हुई नवजात विचित्र बच्‍चों की बात, जिनकी जन्‍म के कुछ समय बाद मृत्‍यु हो गई। लेकिन पटना में ‘क्रोजन सिंड्रोम’ से पीडि़त बच्‍ची शैली का मामला कुछ अलग है। शैली की आंखों के सॉकेट छोटे होने के कारण चोट लगने से आंखें बाहर निकल आती थीं। लाखों में एक बच्चे को होने वाली आंखों की इस जन्मजात बीमारी से परेशान शैली का इलाज गार्ड की नौकरी करने वाले उसके पिता कराने में असमर्थ थे। स्कूल ने भी अजीब आंखों की वजह से शैली का एडमिशन लेने से इनकार कर दिया। उसकी कहानी सलमान खान तक भी पहुंची। तब सलमान की संस्था बीइंग ह्यूमन और कुणाल कपूर की संस्था ‘कीटो ने उसके इलाज का बीड़ा उठाया।

साभार दैनिक जागरण से

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