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कांग्रेसः मरता, क्या नहीं करता ? : डॉ. वेदप्रताप वैदिक

 

*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* कांग्रेस पार्टी आजकल वैचारिक अधःपतन की मिसाल बनती जा रही है। नेहरू की जिस कांग्रेस ने पंथ-निरपेक्षता का झंडा देश में पहराया था, उसी कांग्रेस के हाथ में आज डंडा तो पंथ-निरपेक्षता का है लेकिन उस पर झंडा सांप्रदायिकता का लहरा रहा है। सांप्रदायिकता भी कैसी ? हर प्रकार की। उल्टी भी, सीधी भी। जिससे भी वोट खिंच सकें, उसी तरह की।

भाजपा भाई-भाई पार्टी बन गई है, वैसे ही कांग्रेस भी भाई-बहन पार्टी बन गई है। भाई-बहन को लगा कि भाजपा देश में इसलिए दनदना रही है कि वह हिंदू सांप्रदायिकता को हवा दे रही है तो उन्होंने भी हिंदू मंदिरों, तीर्थों, पवित्र नदियों और साधु-संन्यासियों के आश्रमों के चक्कर लगाने शुरु कर दिए लेकिन उसका भी जब कोई ठोस असर नहीं दिखा तो अब उन्होंने बंगाल, असम और केरल की मुस्लिम पार्टियां से हाथ मिलाना शुरु कर दिया। बंगाल में अब्बास सिद्दिकी के ‘इंडियन सेक्युलर फ्रंट’, असम में बदरूद्दीन अजमल के ‘आॅल इंडिया यूनाइटेड फ्रंट’ और केरल में ‘वेलफेयर पार्टी’ से कांग्रेस ने गठबंधन किसलिए किया है, इसीलिए कि जहां इन पार्टियों के उम्मीदवार न हों, वहां मुस्लिम वोट कांग्रेस को सेंत-मेंत में मिल जाएं। क्या इन वोटों से कांग्रेस चुनाव जीत सकती है ? नहीं, बिल्कुल नहीं। लेकिन फिर ऐसे सिद्धांतविरोधी समझौते कांग्रेस ने क्यों किए हैं ?

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इसीलिए की इन सभी राज्यों में उसका जनाधार खिसक चुका है। अतः जो भी वोट, वह जैसे भी कबाड़ सके, वही गनीमत है। इन पार्टियों के साथ हुए कांग्रेसी गठबंधन को मैंने ठग-बंधन का नाम दिया है, क्योंकि ऐसा करके कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं को तो ठग ही रही है, वह इन मुस्लिम वोटरों को भी ठगने का काम कर रही है। कांग्रेस को वोट देकर इन प्रदेशों के मुस्लिम मतदाता सत्ता से काफी दूर छिटक जाएंगे। कांग्रेस की हार सुनिश्चित है। यदि ये ही मुस्लिम मतदाता अन्य गैर-भाजपा पार्टियां के साथ टिके रहते तो या तो वे किसी सत्तारुढ़ पार्टी के साथ होते या उसी प्रदेश की प्रभावशाली विरोधी पार्टी का संरक्षण उन्हें मिलता। कांग्रेस के इस पैंतरे का विरोध आनंद शर्मा जैसे वरिष्ठ नेता ने दो-टूक शब्दों में किया है। कांग्रेस यों तो अखिल भारतीय पार्टी है लेकिन उसकी नीतियों में अखिल भारतीयता कहां है ? वह बंगाल में जिस कम्युनिस्ट पार्टी के साथ है, केरल में उसी के खिलाफ लड़ रही है। महाराष्ट्र में वह घनघोर हिंदूवादी शिवसेना के साथ सरकार में है और तीनों प्रांतों में वह मुस्लिम संस्थाओं के साथ गठबंधन में है। दूसरे शब्दों में कांग्रेस किसी भी कीमत पर अपनी जान बचाने में लगी हुई है। मरता, क्या नहीं करता ?
03.03.2021

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