तेरे गीत -इरा ठाकुर
इरा ठाकुर
सपने में आभास सा हुआ कि कहीं मैं तुम्हें खोने तो नहीं लगी आकाश विरही सा लगा और धरती अनमनी सी मैंने हवाओं से पूछा तो वो कुछ राज छुपाकर मुस्कुराई तभी तुम्हारे मधुर गीत मेरे कानों से उतरकर मेरे हृदय के तार को झँकृत कर गए मेरे मन ने कहा तुम यहीं कहीं हो मेरे बहुत पास ही कहीं मैंने तुम्हारे हृदय में झाँका वहाँ तो बस मैं ही मैं हूँ और तुम बंसरी लिए मेरे हृदयतल पर बेमिसाल सुर साध रहे हो तेरी बंसरी ने जैसे आकर चुपके से मुझसे कहा ये सभी गीत तेरे लिए हैं मेरा मन चौंक कर कह उठा तो इसीलिए तेरे गाए सभी गीत मेरी पसन्द के हैं तेरे ये अनमोल गीत युग–युगांतर तक तेरी–मेरी कहानी कहते रहेंगे ।


